हर साल 19 अगस्त को पूरी दुनिया विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस मनाती है। यह दिन फ़ोटोग्राफ़ी की कला, विज्ञान और प्रभाव को समर्पित है। 2025 की थीम है – “My Favorite Photo (मेरा पसंदीदा फ़ोटो)”, जो फ़ोटोग्राफ़रों और शौक़ीनों को प्रोत्साहित करती है कि वे अपनी सबसे प्रिय तस्वीर साझा करें और उसके पीछे की कहानी बताएं। यह थीम हमारे जीवन में फ़ोटोग्राफ़ी के व्यक्तिगत जुड़ाव और भावनात्मक शक्ति को रेखांकित करती है।
आधिकारिक थीम: “MY FAVORITE PHOTO (मेरा पसंदीदा फ़ोटो)”
प्रतिभागियों से अपेक्षा की जाती है कि वे,
अपनी पसंदीदा तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करें।
तस्वीर से जुड़ी कहानी या यादें लिखें।
हैशटैग #WorldPhotographyDay और #WorldPhotographyDay2025 का उपयोग करें।
यह थीम दिखाती है कि फ़ोटोग्राफ़ी केवल तकनीक या कौशल नहीं, बल्कि उन क्षणों को कैद करने की कला है, जो हमारे दिल को गहराई से छूते हैं।
12 से 26 अगस्त 2025 तक विश्व फ़ोटोग्राफ़ी सप्ताह मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य है कि लोग नियमित रूप से अपनी सार्थक तस्वीरें साझा करें और #WorldPhotographyWeek टैग का उपयोग करें।
गतिविधियाँ:
व्यक्तिगत फ़ोटो व उनसे जुड़ी कहानियाँ साझा करना।
विश्वभर के फ़ोटोग्राफ़रों को खोजकर उनका अनुसरण करना।
प्रेरणादायक तस्वीरों को लाइक, कमेंट और प्रोत्साहित करना।
यह पहल वैश्विक समुदाय को जोड़ने और प्रोफ़ेशनल व शौक़ीन दोनों तरह के फ़ोटोग्राफ़रों को मंच देने का प्रयास है।
1826: जोसेफ़ नीसफ़ोर निएप्स ने पहली स्थायी तस्वीर बनाई।
1837: लुई डागुएरे ने डागुएरोटाइप प्रक्रिया विकसित की – पहला व्यावसायिक फ़ोटोग्राफ़ी तरीका।
1839: 19 अगस्त को फ़्रांसीसी सरकार ने इस प्रक्रिया को दुनिया के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराया – यही विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस की शुरुआत मानी जाती है।
तब से फ़ोटोग्राफ़ी पूरी दुनिया में संवाद, संरक्षण और कला का सार्वभौमिक माध्यम बन गई।
इतिहास का संरक्षण: सभ्यताओं, धरोहरों और घटनाओं को सहेजना।
सामाजिक परिवर्तन: युद्ध, आपदाओं और स्वतंत्रता संग्रामों को दस्तावेज़ करना।
कला का माध्यम: सृजनात्मकता, सुंदरता और भावनाओं की अभिव्यक्ति।
सूचना और संचार: पत्रकारिता, डॉक्यूमेंट्री और सोशल मीडिया में महत्वपूर्ण।
व्यापार और नवाचार: विज्ञापन, फ़ैशन, सिनेमा, पर्यटन और विज्ञान में उपयोगी।
स्मार्टफ़ोन और डिजिटल कैमरों ने फ़ोटोग्राफ़ी को आम बना दिया।
इंस्टाग्राम, फ़ेसबुक और X (ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ने वैश्विक साझा को संभव किया।
ड्रोन फ़ोटोग्राफ़ी, 360° इमेजिंग और एआई एडिटिंग ने तस्वीर लेने और दिखाने का तरीका बदल दिया।
फोटो प्रदर्शनियां, प्रतियोगिताएं और वर्कशॉप्स।
यूनेस्को, नेशनल ज्योग्राफ़िक और कला संस्थानों के विशेष कार्यक्रम।
शौक़ीन और पेशेवर फ़ोटोग्राफ़र अपनी सर्वश्रेष्ठ रचनाएँ साझा करते हैं।
19वीं सदी: ब्रिटिश शासनकाल में भारत में फ़ोटोग्राफ़ी का आगमन।
प्रमुख हस्तियाँ:
होमाई व्यारावाला – भारत की पहली महिला फोटो पत्रकार।
रघु राय – विश्व प्रसिद्ध फ़ोटोग्राफ़र, मैग्नम फ़ोटोज़ के सदस्य।
आज भारत में फोटो महोत्सव, प्रदर्शनियां और डिजिटल फ़ोटोग्राफ़ी समुदाय सक्रिय हैं, जिससे भारत इस वैश्विक आंदोलन का अहम हिस्सा बन चुका है।
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