विश्व रोगी सुरक्षा दिवस (World Patient Safety Day) हर वर्ष 17 सितंबर को मनाया जाता है। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक वैश्विक पहल है, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, सुरक्षा और भरोसे को बढ़ावा देना तथा चिकित्सीय त्रुटियों को कम करना है।
“हर नवजात और हर बच्चे के लिए सुरक्षित देखभाल”
इस वर्ष का फोकस सबसे नाज़ुक वर्ग – नवजात शिशु और छोटे बच्चों की सुरक्षा पर है, जो अक्सर जन्म, निदान या उपचार के दौरान टाली जा सकने वाली त्रुटियों और संक्रमणों का शिकार होते हैं।
स्थापना: 2019 में WHO द्वारा (विश्व स्वास्थ्य सभा में Global Action on Patient Safety प्रस्ताव पारित होने के बाद)।
उद्देश्य:
रोगी सुरक्षा के महत्व पर जागरूकता फैलाना।
स्वास्थ्य प्रणालियों में संरचनात्मक सुधार लाना।
रोगी-केंद्रित (patient-centered) देखभाल को बढ़ावा देना।
महत्व:
हर साल लाखों मरीज असुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाओं के कारण नुकसान उठाते हैं।
WHO के अनुसार, अस्पताल देखभाल प्राप्त करने वाले 10 में से 1 मरीज को नुकसान होता है, जिनमें से अधिकांश मामले रोके जा सकते हैं।
प्रसूति एवं बाल चिकित्सा वार्डों में संक्रमण रोकथाम।
नवजात और बाल स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना।
शुरुआती स्तर पर सटीक निदान और त्रुटिरहित उपचार।
स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित बाल चिकित्सा देखभाल में प्रशिक्षित करना।
अनावश्यक अस्पताल में लंबा समय और खर्च।
बचाई जा सकने वाली मौतें।
मरीज और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच भरोसे में कमी।
सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा से जवाबदेही, दक्षता और मानवीय गरिमा मजबूत होती है।
WHO के अनुसार, रोगी केवल सेवा प्राप्तकर्ता नहीं बल्कि सक्रिय भागीदार हैं:
पूछें, सुनिश्चित करें, दर्ज करें: निदान, दवाओं और उपचार की पुष्टि करें।
इतिहास और एलर्जी बताएं: चिकित्सकों को स्पष्ट जानकारी दें।
जानकारी प्राप्त करें: जोखिम, दुष्प्रभाव और सुरक्षित उपाय समझें।
सुरक्षा दिशा-निर्देश और टूलकिट प्रकाशित करना।
हर वर्ष वैश्विक जागरूकता अभियान चलाना।
देशों को नीतिगत सुधार लागू करने में सहयोग देना।
त्रुटियों को छिपाने की बजाय उनसे सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देना।
तिथि: हर वर्ष 17 सितंबर
शुरुआत: विश्व स्वास्थ्य संगठन (2019)
2025 की थीम: “हर नवजात और हर बच्चे के लिए सुरक्षित देखभाल”
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