विश्व सरकार शिखर सम्मेलन 2026 का उद्घाटन दुबई में “शेपिंग फ्यूचर गवर्नमेंट्स” (भविष्य की सरकारों का निर्माण) थीम के तहत हुआ। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में दुनिया भर के शीर्ष नेता, नीति-निर्माता, उद्योग जगत के प्रमुख अधिकारी और नीति विशेषज्ञ एक साथ शामिल हुए हैं। यह आयोजन इस बात पर वैश्विक स्तर पर विचार-विमर्श का एक प्रमुख मंच है कि नवाचार, सतत विकास और प्रौद्योगिकी किस प्रकार सार्वजनिक नीतियों और शासन व्यवस्थाओं को नया आकार दे रहे हैं। 5 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य शासन ढांचों को सशक्त बनाना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और वैश्विक समुदाय के सामने मौजूद आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी चुनौतियों का समाधान तलाशना है।
इस सम्मेलन में 6,250 से अधिक प्रतिभागी शामिल हैं, जिनमें 60 से ज्यादा राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख भी मौजूद हैं। यह विशाल भागीदारी आधुनिक शासन से जुड़ी जटिल और परस्पर जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित करती है तथा सामूहिक और सहयोगात्मक समाधान की तत्काल आवश्यकता को उजागर करती है। सम्मेलन के दौरान होने वाली चर्चाओं से ऐसे नीतिगत विचार और साझेदारियाँ सामने आने की उम्मीद है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक शासन मॉडल को प्रभावित करेंगी और अधिक लचीले, समावेशी तथा उत्तरदायी शासन की दिशा तय करेंगी।
थीम और दायरा: “Shaping Future Governments”
“शेपिंग फ्यूचर गवर्नमेंट्स” थीम इस बात को रेखांकित करती है कि शासन व्यवस्था स्वयं एक गहरे परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। यह शिखर सम्मेलन केवल बदलावों पर प्रतिक्रिया देने की बजाय सार्वजनिक प्रशासन, नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए सक्रिय और नवाचारी दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान करता है। इसमें आधुनिक सरकारों के सामने खड़े मूल प्रश्नों पर मंथन होता है—तेजी से बदलती तकनीक के युग में सार्वजनिक संस्थान कैसे प्रभावी और उत्तरदायी बने रहें, नवाचार और सतत विकास के बीच संतुलन कैसे साधा जाए, बहुध्रुवीय विश्व में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को कैसे मजबूत किया जाए, और विविध व बढ़ती अपेक्षाओं वाली आबादी की जरूरतों के अनुरूप शासन ढांचे कैसे ढाले जाएँ।
तिथि और स्थान
विश्व सरकार शिखर सम्मेलन प्रतिवर्ष दुबई (संयुक्त अरब अमीरात) में आयोजित किया जाता है। वर्ष 2026 का संस्करण 5 फरवरी तक चला, जिसने वैश्विक निर्णय-निर्माताओं के लिए गहन संवाद और नेटवर्किंग का सघन मंच प्रदान किया।
पैमाना और सहभागिता
2026 के शिखर सम्मेलन में अभूतपूर्व स्तर की भागीदारी देखने को मिली—
सरकारी कार्य का भविष्य
शिखर सम्मेलन में सबसे प्रमुख विषयों में यह रहा कि स्वयं सरकारी संस्थानों को कैसे विकसित होना चाहिए। इसमें सार्वजनिक प्रशासन में डिजिटल परिवर्तन, सरकारी सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका और 21वीं सदी के अनुरूप सार्वजनिक क्षेत्र की क्षमताओं के निर्माण पर व्यापक चर्चा हुई। सरकारों ने यह भी मंथन किया कि नई तकनीकों को अपनाते हुए जनता का भरोसा कैसे बनाए रखा जाए, कर्मचारियों के कौशल का उन्नयन कैसे किया जाए और सेवा वितरण में दक्षता व समानता के बीच संतुलन कैसे साधा जाए।
अनिश्चित समय में नेतृत्व
नेतृत्व से जुड़े सत्रों में भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और तेज़ तकनीकी बदलावों के बीच देशों का मार्गदर्शन करने की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। आधुनिक नेताओं के लिए आवश्यक गुणों, समावेशी निर्णय-निर्माण को बढ़ावा देने और जटिल परिस्थितियों में सार्वजनिक विश्वास बनाए रखने की रणनीतियों पर गहन चर्चा हुई।
सार्वजनिक वित्त और निवेश प्रवाह
वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव के मद्देनज़र सार्वजनिक वित्त से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया। इसमें सीमित संसाधनों के बीच आवश्यक सेवाओं और बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण, सतत निवेश आकर्षित करने और अल्पकालिक जरूरतों के साथ दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को साधने वाली राजकोषीय नीतियों पर चर्चा शामिल रही। ग्रीन फाइनेंस, जलवायु-संबंधी निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर कराधान प्रमुख विषय रहे।
उभरती प्रौद्योगिकियाँ और नीति-निर्माण
सबसे परिवर्तनकारी विमर्श उभरती तकनीकों—जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन और डिजिटल मुद्राओं—की शासन में भूमिका पर हुआ। नीति-निर्माताओं ने बेहतर निर्णय-निर्माण के लिए AI के उपयोग के साथ-साथ पक्षपात, रोजगार विस्थापन जैसे जोखिमों के प्रबंधन पर विचार किया। साथ ही, नई तकनीकों के लिए नियामक ढांचे और यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि तकनीकी लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से पहुँचें।
सततता और जलवायु शासन
पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान के लिए देशों के बीच अभूतपूर्व समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया गया। चर्चा का केंद्र टिकाऊ अर्थव्यवस्थाओं की ओर संक्रमण, जलवायु प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन और प्रभावित श्रमिकों व समुदायों के लिए न्यायसंगत परिवर्तन सुनिश्चित करना रहा। अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौतों और घरेलू नीतियों के बीच की खाई को पाटने पर भी जोर दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षवाद
शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बदलते स्वरूप पर भी गहन विचार हुआ। बहुध्रुवीय वैश्विक परिदृश्य में साझा चुनौतियों पर सहयोग, संप्रभुता का सम्मान और भिन्न राष्ट्रीय हितों के संतुलन जैसे विषयों पर चर्चा की गई। बहुपक्षीय संस्थानों, क्षेत्रीय ढांचों और नए साझेदारी मॉडलों की भूमिका को भी परखा गया।
क्रिस्टालिना जॉर्जीवा के उद्घाटन वक्तव्य
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था के अप्रत्याशित लचीलेपन पर जोर दिया। उनके आकलन ने यह स्पष्ट किया कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद आर्थिक व्यवस्था ने मजबूती दिखाई है, जो भविष्य की शासन-नीतियों के लिए एक ठोस आधार प्रदान करती है।
मुख्य आर्थिक निष्कर्ष
भू-राजनीतिक तनावों और व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितताओं के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था ने अपेक्षा से अधिक लचीलापन दिखाया है। इसका कारण निजी क्षेत्र की अनुकूलन क्षमता, आपूर्ति शृंखलाओं का विविधीकरण और पूर्व संकटों से सीखी गई निरंतरता रणनीतियाँ हैं। IMF ने आगामी वर्ष के लिए वैश्विक विकास दर के अनुमान को भी ऊपर की ओर संशोधित किया है, जिससे सतर्क आशावाद झलकता है। इसमें संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए बेहतर अनुमानों को शामिल किया गया है, जो क्षेत्रीय मजबूती और भविष्य के प्रति विश्वास को दर्शाता है।
व्यापार नीतियों में बदलाव और परिणाम
जॉर्जीवा ने रेखांकित किया कि शुल्क दबावों के बावजूद वैश्विक व्यापार ढहा नहीं, बल्कि उसने खुद को ढाल लिया। जहाँ प्रारंभिक अनुमानों में प्रभावी टैरिफ दरें 20 प्रतिशत से अधिक मानी जा रही थीं, वहीं वास्तविकता में बातचीत और द्विपक्षीय समझौतों के बाद प्रभावी वसूली लगभग 9 प्रतिशत पर स्थिर हुई। अमेरिका की व्यापार और विदेश नीति में हालिया बदलावों ने एक अधिक बहुध्रुवीय और विविधीकृत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को जन्म दिया है, जिससे दीर्घकाल में लचीलापन बढ़ा और निर्भरताएँ घटी हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एक आर्थिक प्रेरक के रूप में
AI को लेकर सबसे अधिक आशावाद व्यक्त किया गया। व्यवसाय और नीति-निर्माता इसे उत्पादकता बढ़ाने वाला प्रमुख कारक मान रहे हैं—चाहे वह विनिर्माण हो, स्वास्थ्य सेवा, वित्त या सार्वजनिक सेवाएँ। निजी क्षेत्र में AI में बड़े निवेश इस विश्वास को दर्शाते हैं कि ठोस उत्पादकता लाभ संभव हैं। सरकारों के लिए यह अवसरों के साथ जिम्मेदारियाँ भी लाता है—नवाचार-सक्षम नियमन, शिक्षा व कौशल विकास में निवेश, और यह सुनिश्चित करना कि AI के लाभ व्यापक रूप से साझा हों, न कि केवल सीमित वर्गों तक सिमट जाएँ।
नवाचार और सावधानी के बीच संतुलन
शिखर सम्मेलन में तकनीक और आर्थिक संभावनाओं को लेकर आशावाद के साथ-साथ शासन से जुड़ी गंभीर चुनौतियों को भी स्वीकार किया गया। प्रमुख प्रश्न यह है कि सरकारें नवाचार को बढ़ावा देते हुए नागरिकों को संभावित जोखिमों से कैसे सुरक्षित रखें। साथ ही, नियामक ढाँचों को इतनी तेजी से कैसे विकसित किया जाए कि वे तकनीकी बदलावों के साथ तालमेल रखें, लेकिन उपयोगी और लाभकारी विकास को बाधित न करें।
असमानता और समावेशन की चुनौती
केवल आर्थिक वृद्धि समावेशी समृद्धि की गारंटी नहीं देती। शिखर सम्मेलन ने इस बात पर जोर दिया कि शासन ढाँचे ऐसे हों जो तकनीकी और आर्थिक लाभों को समाज के सभी वर्गों तक पहुँचाएँ, ताकि असमानता कम हो, न कि बढ़े। इसके लिए शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा जाल और अवसरों तक समान पहुँच पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना
एक अधिक बहुध्रुवीय विश्व में पारंपरिक बहुपक्षीय संस्थानों के सामने चुनौतियाँ हैं, लेकिन सहयोग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। सम्मेलन में इस पर चर्चा हुई कि देश महामारी, जलवायु परिवर्तन और साइबर सुरक्षा जैसी साझा चुनौतियों से निपटने के लिए एक-दूसरे के साथ कैसे काम कर सकते हैं, साथ ही विभिन्न हितों और शासन मॉडलों का सम्मान भी बनाए रख सकते हैं।
लचीली और सक्षम प्रणालियों का निर्माण
कोविड-19 महामारी और उसके बाद की परिस्थितियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी प्रणालियों में लचीलापन कितना महत्वपूर्ण है। शिखर सम्मेलन ने ऐसे अनुकूलनीय और उत्तरदायी संस्थानों के निर्माण पर जोर दिया जो संकटों का सामना करते हुए भी आवश्यक सेवाएँ प्रदान कर सकें और जनता का विश्वास बनाए रखें।
नीतिगत नवाचार और साझेदारियाँ
विश्व सरकार शिखर सम्मेलन में हुई चर्चाओं से ठोस नीतिगत नवाचार सामने आने की उम्मीद है, जिन्हें सहभागी सरकारें अपने-अपने देशों में लागू कर सकती हैं। राष्ट्राध्यक्षों, मंत्रियों और विशेषज्ञों के बीच गहन संवाद और नेटवर्किंग से द्विपक्षीय व बहुपक्षीय साझेदारियों के अवसर बनते हैं, जो साझा वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में सहायक होंगे।
वैश्विक शासन मॉडलों पर प्रभाव
इस शिखर सम्मेलन में चर्चा और समर्थन पाए विचार अक्सर वैश्विक स्तर पर शासन के तरीकों को प्रभावित करते हैं। सरकारें एक-दूसरे के अनुभवों से सीखती हैं, श्रेष्ठ प्रथाओं को अपनाती हैं और साझा समस्याओं से निपटने के लिए सामान्य ढाँचे विकसित करती हैं। यह सम्मेलन शासन नवाचार की एक प्रयोगशाला के रूप में कार्य करता है।
भविष्य की वैश्विक संवाद-एजेंडा का निर्धारण
दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर, यह शिखर सम्मेलन तय करता है कि किन शासन संबंधी चुनौतियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता और संसाधन मिलेंगे। यहाँ उठाए गए विषय अक्सर अंतरराष्ट्रीय संगठनों, शोध संस्थानों और सरकारों के नीति एजेंडे का हिस्सा बन जाते हैं।
कार्यान्वयन के लिए गति का निर्माण
दर्जनों राष्ट्राध्यक्षों और सैकड़ों मंत्रियों की सामूहिक भागीदारी से शासन सुधारों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को लागू करने के लिए राजनीतिक गति बनती है। यह साझा संकल्प नीतियों को कागज से जमीन तक पहुँचाने में मदद करता है।
मेज़बान शहर के रूप में दुबई का महत्व कई स्तरों पर है। एक वैश्विक, आधुनिक और अत्याधुनिक अवसंरचना वाले शहर के रूप में दुबई उस नवाचार और दूरदर्शिता का प्रतीक है, जिसे यह शिखर सम्मेलन प्रोत्साहित करता है। पूर्व और पश्चिम, उत्तर और दक्षिण के बीच सेतु की भूमिका निभाने वाला दुबई बहुध्रुवीय और परस्पर जुड़े विश्व पर होने वाली चर्चाओं के लिए एक उपयुक्त स्थान है। साथ ही, संयुक्त अरब अमीरात के अपने शासन नवाचार और आर्थिक विविधीकरण के प्रयास बदलती वैश्विक परिस्थितियों में सफल अनुकूलन के प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
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