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World Economic Forum की वार्षिक बैठक स्विट्जरलैंड के दावोस में शुरू हुई

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की पाँच दिवसीय वार्षिक बैठक स्विट्जरलैंड के दावोस में 16 जनवरी 2023 को शुभारंभ हुआ। यह विश्व आर्थिक मंच का 53वां संस्करण है जिसका आयोजन 20 जनवरी 2023 तक किया जाएगा। विश्व आर्थिक मंच का 53वां संस्करण के बैठक की थीम ‘कोऑपरेशन इन ए फ्रैगमेंटेड वर्ल्ड’ (‘विभाजित दुनिया में सहयोग’) है। बैठक में चर्चा के मुख्य विषयों जैसे यूक्रेन संकट, वैश्विक मुद्रास्फीति, जयवायु परिवर्तन आदि पर चर्चा की संभावना है।

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इस बैठक में भाग लेने वाले वैश्विक नेताओं में यूरोपियन आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज, यूरोपीय संसद के अध्यक्ष रॉबर्टा मेट्सोला, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल एम रामाफोसा, स्पेन के प्रधान मंत्री पेड्रो सांचेज, दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति यून सुक-योल, स्विस राष्ट्रपति एलेन बेर्सेट और फिनलैंड की प्रधानमंत्री सना मारिन आदि मुख्य हैं।

 

विश्व आर्थिक मंच के संस्थापक और कार्यकारी अध्यक्ष क्लॉस श्वाब ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक समस्याओं ने राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर मतभेद बढ़ा दिए हैं, जिनका समाधान सरकार और व्यापार जगत के बीच अनुकूल परिस्थितियों के निर्माण में सहयोग और विश्वास के साथ ढूंढना होगा। इस बैठक में दुनिया भर के आर्थिक, ऊर्जा और खाद्यान संकट के मुद्दों पर चर्चा होती है।

 

बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व

 

विश्व आर्थिक मंच की बैठक में कई भारतीय नेता भाग ले रहे हैं। इनमें मुख्य केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, मनसुख मंडाविया, स्मृति ईरानी और आरके सिंह के अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी भाग ले रहे हैं। व्यापार जगत के प्रमुख दिग्गजों में गौतम अदाणी, संजीव बजाज, कुमार मंगलम बिड़ला, एन चंद्रशेखरन, नादिर गोदरेज, सज्जन जिंदल, सुनील मित्तल, रोशनी नादर मल्होत्रा, नंदन नीलेकणि, अदार पूनावाला, रिषद प्रेमजी ने बैठक में शामिल हुए।

 

विश्व आर्थिक मंच के बारे में

 

विश्व आर्थिक फ़ॉरम स्विट्ज़रलैंड में स्थित एक ग़ैर-लाभकारी संस्था है। इसका मुख्यालय कोलोग्नी में है। स्विस अधिकारीयों द्वारा इसे एक निजी-सार्वजनिक सहयोग के लिए एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है। इसका मिशन विश्व के व्यवसाय, राजनीति, शैक्षिक और अन्य क्षेत्रों में अग्रणी लोगों को एक साथ ला कर वैशविक, क्षेत्रीय और औद्योगिक दिशा तय करना है।

इस मंच की स्थापना 1971 में यूरोपियन प्रबन्धन के नाम से जिनेवा विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर क्लॉस एम श्वाब द्वारा की गई थी। उस वर्ष यूरोपियन कमीशन और यूरोपियन प्रोद्योगिकी संगठन के सौजन्य से इस संगठन की पहली बैठक हुई थी।

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vikash

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