विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 2025: जानें इस दिन का इतिहास और महत्व

हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस (World Day Against Child Labour Date) मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद दुनिया भर में बच्चों से काम करवाने की समस्या पर ध्यान खींचना और इसे खत्म करने के लिए लोगों को जागरूक करना है। 2025 की थीम है: “प्रगति स्पष्ट है, लेकिन अभी और काम करना बाकी है: आइए प्रयासों में तेजी लाएं”। यह थीम अब तक हुई उपलब्धियों को स्वीकार करती है, लेकिन इस बात पर भी ज़ोर देती है कि बाल श्रम को समाप्त करने के लिए वैश्विक प्रयासों में तेजी लाना बेहद आवश्यक है, क्योंकि 2024 में 138 मिलियन (13.8 करोड़) बच्चे अब भी बाल श्रम में लगे हुए थे।

समाचार में क्यों?

  • 12 जून 2025 को बाल श्रम के विरुद्ध विश्व दिवस की 21वीं वर्षगांठ मनाई गई।

  • इस दिवस की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने वर्ष 2002 में की थी।

  • 2025 की थीम यह स्पष्ट करती है कि प्रगति हो रही है, लेकिन बाल श्रम को पूरी तरह समाप्त करने के लिए वैश्विक प्रयासों में तेजी ज़रूरी है।

2025 की थीम

“प्रगति स्पष्ट है, लेकिन अभी और करना बाकी है: आइए हम अपने प्रयासों को तेज़ करें!”
इसका उद्देश्य है:

  • बाल श्रम में कमी को पहचानना।

  • इसे पूर्णतः समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रयासों को पुनः समर्पित करना।

  • संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG) 8.7 के साथ तालमेल बनाना।

इस दिन के उद्देश्य

  • बाल श्रम के शोषण के प्रति वैश्विक जागरूकता फैलाना।

  • बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और बचपन का अधिकार दिलाने की वकालत करना।

  • गरीबी से प्रभावित विकासशील देशों में बाल श्रम की चुनौतियों को उजागर करना।

  • सरकारों, गैर-सरकारी संगठनों और आम नागरिकों को नीति-निर्माण और क्रियान्वयन में भागीदारी के लिए प्रेरित करना।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • प्रथम आयोजन: 12 जून 2002

  • आरंभकर्ता: अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO)

  • मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड

  • 2025 में वर्षगांठ: 21 वर्ष पूर्ण

वैश्विक और भारतीय संदर्भ

  • 2024 में: विश्व स्तर पर 138 मिलियन बच्चे बाल श्रम में शामिल पाए गए।

  • भारत में बाल श्रम से निपटने के उपाय:

    • राष्ट्रीय बाल श्रम नीति (1987)

    • बाल श्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016

    • प्रभावित बच्चों के लिए पुनर्वास कार्यक्रम

    • शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 के तहत मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा

इस दिवस का महत्व

  • बचपन एक अधिकार है, विशेषाधिकार नहीं।

  • यह दिन एक वैश्विक नैतिक और कानूनी चेतावनी के रूप में कार्य करता है।

  • यह प्रयासों को बढ़ाता है:

    • गरीबी और शिक्षा की कमी जैसी जड़ों से लड़ने के लिए।

    • श्रम कानूनों के कड़े प्रवर्तन के लिए।

    • प्रभावित बच्चों के लिए पुनर्वास और पुनर्समावेशन कार्यक्रमों को लागू करने के लिए।

    • बच्चों के पोषण, सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर ज़ोर देने के लिए।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर: IRENA

वर्ष 2025 में, भारत दुनिया के तीसरे सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा बाज़ार के रूप में…

10 hours ago

मिशन मित्र क्या है? गगनयान के लिए ISRO का नया प्रयोग—पूरी जानकारी

भारत के गगनयान मिशन ने लद्दाख की बेहद कठिन परिस्थितियों में एक अनोखा प्रयोग शुरू…

12 hours ago

NCERT को मिला ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा: भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए इसका क्या मतलब है?

केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की सलाह पर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण…

12 hours ago

E20 पेट्रोल क्या है? 2026 से पूरे देश में लागू नई व्यवस्था

1 अप्रैल से, पूरे देश में फ़्यूल स्टेशन अब ऐसा पेट्रोल सप्लाई कर रहे हैं…

13 hours ago

कक्षा तीन से आठ के लिए CT और AI करिकुलम लॉन्च: CBSE

सीबीएसई बोर्ड के मान्यता प्राप्त स्कूलों से लेकर 22 राज्यों के सरकारी स्कूलों के कक्षा…

16 hours ago

सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक भारत जनगणना 2027 के ब्रांड एंबेसडर नियुक्त

भारत सरकार ने मशहूर रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक को जनगणना 2027 के लिए ब्रांड एंबेसडर…

16 hours ago