ईरान और इजरायल के बढ़ते संघर्ष के दौरान 21 मार्च 2026 को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। दरअसल ईरानी मिसाइलों ने डिमोना और अराद शहरों पर हमला किया। इस हमले में 100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की खबर है, जिसमें डिमोना को शुरुआती हमले का सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। इस घटना को चौंकाने वाली बनाती है वह यह है कि डिमोना को लंबे समय से इजरायल के सबसे सुरक्षित शहरों में से एक माना जाता रहा है। आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह।
डिमोना को इतना सुरक्षित इसकी एडवांस्ड और बहुस्तरीय हवाई रक्षा प्रणाली बनाती है। आने वाले खतरों को रोकने के लिए आयरन डोम और पैट्रियट मिसाइल प्रणाली जैसे सिस्टम तैनात किए गए थे। यह सिस्टम मिसाइलों का पता लगाने, उन पर नजर रखने और हवा में ही नष्ट करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। इससे डिमोना जैसे जरूरी क्षेत्रों के ऊपर एक सुरक्षा कवच बन जाता है।
डिमोना का महत्व वहां मौजूद शिमोन पेरेस नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र की वजह से है। यह इजरायल की सबसे गुप्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सुविधाओं में से एक है। ऐसा माना जाता है कि यह सुविधा इजरायल के परमाणु कार्यक्रम का मुख्य केंद्र है। इससे यह देश के सबसे ज्यादा सुरक्षित स्थानों में से एक बन जाता है।
डिमोना के ऊपर का हवाई क्षेत्र दुनिया के सबसे ज्यादा प्रतिबंधित क्षेत्रों में से एक है। इसे एक सख्त नो-फ्लाइट जोन घोषित किया गया है। इसका मतलब है कोई भी अनाधिकृत विमान चाहे वह नागरिक हो या फिर सैन्य, इसमें प्रवेश नहीं कर सकता।
डिमोना नेगेव रेगिस्तान के काफी अंदर तक बसा है। यह बड़े आबादी वाले केंद्रों से काफी दूर है। इस भौगोलिक एकांत ने इसे दुश्मनों के लिए एक कठिन लक्ष्य बना दिया है। यह दूरी अचानक होने वाले हमलों की संभावना को कम करती है। इससे आसपास होने वाले नुकसान सीमित हो जाते हैं।
इन सबके अलावा परमाणु सुविधा के लिए जरूरी हिस्से भूमिगत बनाए गए हैं और कंक्रीट व स्टील की मोटी परतों से इन्हें सुरक्षा दी गई है। यह संरचनाएं खास तौर से भारी बमबारी का सामना करने के लिए डिजाइन की गई हैं। इससे इन्हें नष्ट करना और भी मुश्किल हो जाता है।
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