ग्रामीण परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत संकेत देते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में घोषित किया है। यह घोषणा खेती, पशुपालन और सहायक क्षेत्रों को राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और दीर्घकालिक विकास रणनीति की रीढ़ मानते हुए, इन क्षेत्रों पर सरकार के नए सिरे से केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती है।
क्यों चर्चा में है?
मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने भोपाल में आयोजित राज्य-स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह को संबोधित करते हुए घोषणा की कि वर्ष 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा।
कृषि बजट में वृद्धि और विकास का दृष्टिकोण
- राज्यपाल ने बताया कि राज्य के कृषि एवं सहायक क्षेत्रों के बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह बजट वर्ष 2002–03 में ₹600 करोड़ से बढ़कर 2024–25 में ₹27,000 करोड़ से अधिक हो गया है।
- यह वृद्धि सरकार के “समृद्ध किसान, समृद्ध राज्य” के दृष्टिकोण को दर्शाती है।
- मध्य प्रदेश ने कृषि विकास के लिए दस प्रमुख फोकस क्षेत्रों पर आधारित बहुआयामी मॉडल अपनाया है, जिनमें तकनीक हस्तांतरण, आय वृद्धि, प्राकृतिक खेती, नवाचार, डिजिटल पारदर्शिता, विपणन और निर्यात शामिल हैं। इन सुधारों का उद्देश्य कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और बाजार-उन्मुख बनाना है।
बाजार सुधार और ई-मंडी का विस्तार
- कृषि अभियान की एक प्रमुख उपलब्धि कृषि मंडियों में सुधार है।
- राज्य में 259 मंडियों में ई-मंडी योजना लागू की जा चुकी है, जिसमें लगभग 40 लाख किसान पंजीकृत हैं।
- यह डिजिटल एकीकरण किसानों को पारदर्शी मूल्य, बिचौलियों की भूमिका में कमी और व्यापक बाजारों तक बेहतर पहुंच प्रदान करता है। इन सुधारों से किसानों की आय बढ़ने और राज्य में मूल्य खोज (प्राइस डिस्कवरी) मजबूत होने की उम्मीद है।
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र पर जोर
- पशुपालन को राज्य के लिए एक प्रमुख विकास इंजन के रूप में चिन्हित किया गया है।
- मध्य प्रदेश का लक्ष्य डेयरी को एक लाभकारी ग्रामीण गतिविधि में बदलते हुए देश की दुग्ध राजधानी बनना है।
- डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत राज्य राष्ट्रीय दुग्ध उत्पादन में अपनी हिस्सेदारी को 9% से बढ़ाकर 20% करने का लक्ष्य रखता है।
- अब तक 1,200 से अधिक नई दुग्ध सहकारी समितियाँ गठित की जा चुकी हैं और दूध के क्रय मूल्य में ₹2.50 से बढ़कर ₹8.50 प्रति लीटर की वृद्धि हुई है, जिससे डेयरी किसानों को बड़ा लाभ मिला है।
गौशालाओं और ग्रामीण आजीविका को समर्थन
- राज्यपाल ने निराश्रित पशुओं के लिए गौशालाओं को दी जाने वाली सहायता बढ़ाने की घोषणा की।
- प्रति पशु अनुदान ₹20 से बढ़ाकर ₹40 कर दिया गया है, जबकि बजटीय आवंटन ₹250 करोड़ से बढ़कर ₹505 करोड़ हो गया है।
- इन कदमों का उद्देश्य पशु कल्याण को बढ़ावा देना और पशुपालन से जुड़ी ग्रामीण आजीविकाओं को स्थिरता प्रदान करना है।
ग्रामीण अवसंरचना और रोजगार पहल
- कृषि के साथ-साथ राज्य ग्रामीण अवसंरचना को भी मजबूत कर रहा है।
- आवास, सड़क संपर्क और रोजगार सृजन से जुड़ी योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है ताकि कृषि विकास को सहारा मिल सके।
- बेहतर अवसंरचना से फसलोत्तर नुकसान में कमी, बाजारों तक बेहतर पहुंच और ग्रामीण क्षेत्रों में गैर-कृषि रोजगार के अवसर सृजित होने में मदद मिलेगी।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]