खर्ग द्वीप हाल के दिनों में बढ़ते इज़राइल-ईरान संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों और नीति-निर्माताओं का ध्यान आकर्षित कर रहा है। यह फारस की खाड़ी में स्थित एक छोटा लेकिन बेहद रणनीतिक द्वीप है। क्षेत्र में सैन्य तनाव और हमलों के बावजूद अब तक इस द्वीप को निशाना नहीं बनाया गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि यह ईरान के तेल निर्यात और उसकी अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। खर्ग द्वीप से ही ईरान के अधिकांश कच्चे तेल की खेप दुनिया भर के देशों तक भेजी जाती है, जिससे यह पश्चिम एशिया का एक प्रमुख ऊर्जा केंद्र बन जाता है।
खर्ग द्वीप फारस की खाड़ी में ईरान के दक्षिण-पश्चिमी तट से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है। आकार में छोटा होने के बावजूद यह ईरान का प्रमुख कच्चे तेल का निर्यात टर्मिनल है, जो देश के तेल क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ता है।
इस द्वीप का महत्व इसके भूगोल से भी जुड़ा है। ईरान के अधिकांश समुद्री तट उथले हैं, जिससे बड़े तेल टैंकरों का लगना कठिन होता है। लेकिन खर्ग द्वीप के आसपास गहरे पानी की सुविधा है, जिससे विशाल सुपरटैंकर आसानी से तेल भरकर दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचा सकते हैं।
खर्ग द्वीप पर तेल से जुड़ी अवसंरचना का विकास 1960 के दशक में हुआ था, जब अमेरिकी तेल कंपनी अमोको की सहायता से यहां सुविधाएं बनाई गईं। समय के साथ यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात नेटवर्क की रीढ़ बन गया।
आज यह टर्मिनल प्रतिदिन लगभग 70 लाख बैरल (7 मिलियन बैरल) कच्चे तेल को टैंकरों में लोड करने की क्षमता रखता है। यहां विशाल भंडारण टैंक, गहरे समुद्र तक फैले जेट्टी, कर्मचारियों के आवासीय क्षेत्र और एक छोटा एयरस्ट्रिप भी मौजूद है, जो इसे मुख्य भूमि ईरान से जोड़ता है।
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