भारत ने अपने कंटेनर ट्रेड पर फिर से कंट्रोल पाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने भारत कंटेनर शिपिंग लाइन बनाने के लिए एक एग्रीमेंट साइन किया है। यह एक नई नेशनल शिपिंग कंपनी होगी जिसका मकसद भारत के लॉजिस्टिक्स और समुद्री इकोसिस्टम को मजबूत करना है। यूनियन बजट 2026-27 के साथ घोषित यह पहल शिपिंग, बंदरगाहों, रेलवे और कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग को एक ही विजन के तहत जोड़ती है। चूंकि कंटेनर वाला कार्गो भारत के विदेशी व्यापार की रीढ़ है, इसलिए इस कदम से आत्मनिर्भरता बढ़ने, लॉजिस्टिक्स लागत कम होने और ग्लोबल कॉम्पिटिशन में सुधार होने की उम्मीद है।
भारत कंटेनर शिपिंग लाइन एक नई सरकारी समर्थन वाली शिपिंग कंपनी है, जिसका उद्देश्य भारत के कंटेनर व्यापार को भारतीय नियंत्रण में सुदृढ़ करना है। इसका लक्ष्य विदेशी शिपिंग लाइनों पर निर्भरता कम करना और निर्यातकों व आयातकों के लिए कंटेनरों की सुनिश्चित उपलब्धता प्रदान करना है। यह पहल भारत के बंदरगाह और रेल अवसंरचना से घनिष्ठ रूप से जुड़ी है, जिससे देशभर में माल की निर्बाध आवाजाही संभव हो सकेगी। चूंकि कंटेनरीकृत कार्गो भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मूल्य का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है, इसलिए BCSL को व्यापार लचीलापन और रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति माना जा रहा है।
इस समझौता ज्ञापन (MoU) पर प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की लॉजिस्टिक्स और पोर्ट संस्थाओं—शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, जेएनपीए, चेन्नई पोर्ट प्राधिकरण, वी. ओ. चिदंबरनार पोर्ट प्राधिकरण और सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन—के बीच हस्ताक्षर किए गए। यह हस्ताक्षर केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और अश्विनी वैष्णव की उपस्थिति में हुए। उनकी मौजूदगी बंदरगाह, शिपिंग, रेलवे और लॉजिस्टिक्स के बीच मजबूत समन्वय को दर्शाती है, जो पीएम गति शक्ति और सागरमाला कार्यक्रमों के प्रमुख स्तंभ हैं।
BCSL की पहल केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित ₹10,000 करोड़ की कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम से जुड़ी हुई है। इसका उद्देश्य भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कंटेनर निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। अगले एक दशक में भारत लगभग 10 लाख टीईयू वार्षिक घरेलू निर्माण क्षमता का लक्ष्य रखता है। यह एकीकरण सुनिश्चित करता है कि कंटेनर केवल भारतीय शिपिंग लाइनों द्वारा ढोए ही नहीं जाएं, बल्कि उनका निर्माण भी देश में हो, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिले और आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों में कमी आए।
BCSL के साथ-साथ, वी. ओ. चिदंबरनार पोर्ट प्राधिकरण में आउटर हार्बर परियोजना के वित्तपोषण के लिए एक अलग त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) भी हस्ताक्षरित किया गया। इस समझौते में वीओसीपीए, इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) और सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन शामिल हैं, जिसके तहत ₹15,000 करोड़ तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। परियोजना का मुख्य उद्देश्य हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के माध्यम से बंदरगाह क्षमता का विस्तार करना है। यह पहल सागरमाला और पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बढ़ते कार्गो वॉल्यूम को संभालने के लिए भारत की बंदरगाह अवसंरचना को और मजबूत बनाएगी।
भारत कंटेनर शिपिंग लाइन से भारत के समुद्री व्यापार में बहुगुणक प्रभाव उत्पन्न होने की उम्मीद है। कंटेनर शिपिंग पर भारतीय नियंत्रण सुनिश्चित कर यह पहल वैश्विक व्यवधानों के समय निर्यात को सुरक्षित रखने, मालभाड़े में उतार-चढ़ाव को कम करने और वैश्विक समुद्री मार्गों में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करने में सहायक होगी। यह पहल जहाज निर्माण, जहाज पुनर्चक्रण और समुद्री वित्त से जुड़े पूर्व प्रयासों का भी पूरक है। सामूहिक रूप से, ये कदम दीर्घकालिक लॉजिस्टिक्स संप्रभुता और वैश्विक व्यापार लचीलेपन की दिशा में भारत के स्पष्ट बदलाव को दर्शाते हैं।
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