
देश की थोक मुद्रास्फीति अक्टूबर के 8.39 प्रतिशत से घटकर नवंबर में 5.85 प्रतिशत हो गई है। थोक मुद्रास्फीति मार्च 2021 के बाद तीसरी बार दोहरे अंकों से नीचे आई है। अप्रैल 2022 से सितंबर 2022 तक लगातार 18 महीनों के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) ऊपर बना रहा। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि देश में थोक महंगाई में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। अक्टूबर 2021 में WPI 13.83 फीसदी थी। माह-दर-माह महंगाई में कमी का श्रेय सब्जियों, आलू, प्याज, फलों और दूध की कीमतों में आई कमी को दिया जा सकता है।
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19 महीने तक दहाई अंकों में रहने के बाद अक्टूबर में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर घटकर 8.39 फीसदी पर आ गई थी। नवंबर 2021 में महंगाई दर 14.87 फीसदी थी। उद्योग मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि नवंबर 2022 में मुद्रास्फीति की दर में गिरावट मुख्य रूप से पिछले वर्ष के इसी महीने की तुलना में फूड अकाउंट, बुनियादी धातु, कपड़ा, रसायन और रासायनिक उत्पादों और कागज उत्पादों की कीमतों में कमी के कारण है।
सरकार तथा आरबीआई के लगातार प्रयासों की बदौलत खुदरा मुद्रास्फीति नवंबर में 9 महीने के निचले स्तर पर आ गई है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में मुद्रास्फीति घटकर 5.88% हो गई है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति अनुकूल आधार प्रभाव के कारण अक्टूबर में तेजी से गिरकर 6.77 प्रतिशत हो गई थी। इस बार यह 6 प्रतिशत से अधिक के टॉलरेंस बैंड से कुछ नीचे आई है। लगातार 10 महीने तक मुद्रास्फीति 6 फीसद से ऊपर बनी हुई थी।
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