रंग केवल देखने की वस्तु नहीं होते, बल्कि भावनाओं, कहानियों और गहरे अर्थों को दर्शाते हैं। कुछ रंग हमें शांति देते हैं, तो कुछ ऊर्जा और उत्साह से भर देते हैं। इतिहास में एक ऐसा रंग रहा है जो अपनी सुंदरता, दुर्लभता और राजाओं–महाराजाओं से जुड़ाव के कारण सबसे अलग माना गया। यह रंग शक्ति, वैभव और महानता का प्रतीक बन गया।
बैंगनी (Purple) रंग को ‘रंगों का राजा’ कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह सदियों से राजाओं, रानियों, सत्ता और ऐश्वर्य से जुड़ा रहा है। प्राचीन काल में बैंगनी रंग बनाना बहुत कठिन और अत्यंत महँगा था। केवल शासक वर्ग और अमीर लोग ही इसे पहन सकते थे। इसी कारण बैंगनी रंग अधिकार, सम्मान और ऊँचे दर्जे का प्रतीक बन गया।
प्राचीन समय में बैंगनी रंग एक विशेष समुद्री घोंघे से निकाला जाता था।
इस कारण केवल सम्राट, राजा और कुलीन वर्ग ही बैंगनी वस्त्र पहन सकते थे। कई साम्राज्यों में आम लोगों को बैंगनी रंग पहनने की अनुमति तक नहीं थी। इसकी दुर्लभता और कीमत ने इसे सोने से भी अधिक मूल्यवान बना दिया, इसलिए इसे ‘King of Colours’ कहा गया।
बैंगनी रंग की कहानी फोनीशिया, यूनान और रोम जैसी प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ी है।
इस तरह बैंगनी रंग राजसत्ता का स्पष्ट चिन्ह बन गया।
सदियों तक बैंगनी रंग का प्रयोग
में होता रहा। यूरोपीय राजाओं के राज्याभिषेक और धार्मिक समारोहों में भी इसका विशेष स्थान था। चर्च के वरिष्ठ धर्मगुरु भी इसे आध्यात्मिक अधिकार के प्रतीक के रूप में पहनते थे।
विभिन्न संस्कृतियों में बैंगनी रंग का अर्थ है:
नीले की शांति और लाल की ऊर्जा का मिश्रण होने के कारण यह रंग संतुलित लेकिन प्रभावशाली लगता है।
आज भले ही बैंगनी रंग आसानी से उपलब्ध हो, लेकिन उसका महत्व अब भी बना हुआ है। इसका प्रयोग होता है:
आज भी बैंगनी रंग विशेषता और उत्कृष्टता का एहसास कराता है।
बैंगनी रंग
इसी कारण यह रंग स्वाभाविक रूप से ध्यान और सम्मान आकर्षित करता है।
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