कनाडा में एक अलगाववादी नेता की हत्या में भारत सरकार की संलिप्तता के आरोपों को लेकर हाल ही में भारत-कनाडा गतिरोध ने फाइव आइज़ एलायंस की भूमिका पर ध्यान आकर्षित किया है। हाल ही में कनाडाई प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया है कि कनाडा में खालिस्तान आंदोलन के उन्नायक एक सिख अलगाववादी नेता की हत्या में भारत सरकार के “संभावित संबंध” हो सकते हैं, इसलिये दोनों देशों के बीच संबंध तनाव में हैं, साथ ही उनके आरोपों को फाइव आइज़ अलायंस की रिपोर्टों का समर्थन प्राप्त है।
खुफिया जानकारी जुटाने और सुरक्षा के मामलों में विभिन्न देश अक्सर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। हाल के वर्षों में चीन की बढ़त को संतुलित अथवा नियंत्रित करने जैसे सामान्य हितों से फाइव आईज़ देशों के बीच घनिष्ठता बढ़ी है। उनकी निकटता का श्रेय एक समान भाषा और दशकों के सहयोग से बने आपसी विश्वास को भी दिया जाता है। साल 2016 में फाइव आइज़ इंटेलिजेंस ओवरसाइट एंड रिव्यू काउंसिल अस्तित्व में आई। इसमें फाइव आईज़ देशों की गैर-राजनीतिक खुफिया निगरानी, समीक्षा और सुरक्षा संस्थाएँ भी शामिल हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह गठबंधन सर्वप्रथम अस्तित्त्व में आया। यू.के. और यू.एस. ने क्रमशः जर्मन और जापानी कूटों को हल करते हुए खुफिया जानकारी साझा करने का निर्णय लिया। साल 1943 में, ब्रिटेन-यू.एस.ए. (BRUSA) समझौते ने यू.के.-यू.एस.ए. (UKUSA) समझौते की नींव रखी। यूरोप में अमेरिकी सेनाओं का समर्थन करने के लिये दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने के लिये BRUSA पर हस्ताक्षर किये गए थे। इसके बाद साल 1946 में UK-USA समझौते पर हस्ताक्षर किये गए। साल 1949 में कनाडा इसमें शामिल हुआ और एक अन्य गठबंधन का निर्माण करते हुए न्यूज़ीलैंड तथा ऑस्ट्रेलिया साल 1956 में शामिल हो गए। इस समझौते को आधिकारिक रूप से स्वीकृति नहीं दी गई थी, हालांकि इसके अस्तित्त्व के बारे में 1980 के दशक से ही जानकारी थी। लेकिन UK-USA समझौते की फाइलें/जानकारी साल 2010 में जारी की गईं।
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