संयुक्त राज्य अमेरिका ने 100 साल पुराने जोन्स एक्ट को 60 दिनों के लिए अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। यह फैसला ईरान युद्ध के कारण बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच लिया गया है। इसकी घोषणा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की, जिसका उद्देश्य आपूर्ति बाधाओं को कम करना और ऊर्जा लागत को नियंत्रित करना है। सामान्यतः यह कानून घरेलू शिपिंग को केवल अमेरिकी जहाजों तक सीमित करता है, लेकिन इस छूट के बाद अब विदेशी जहाजों को भी अमेरिकी बंदरगाहों के बीच ईंधन परिवहन की अनुमति मिल गई है।
जोन्स एक्ट, जिसे आधिकारिक रूप से मर्चेंट मरीन अधिनियम, 1920 कहा जाता है, अमेरिका का एक महत्वपूर्ण कानून है जो देश के भीतर समुद्री व्यापार (एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक) को नियंत्रित करता है। यह कानून प्रथम विश्व युद्ध के बाद लागू किया गया था, ताकि घरेलू शिपिंग उद्योग को मजबूत किया जा सके और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
इस कानून के तहत अमेरिका के भीतर माल परिवहन के लिए कुछ सख्त शर्तें निर्धारित हैं—
इन नियमों का मुख्य उद्देश्य स्थानीय रोजगार की रक्षा करना और एक मजबूत व सक्षम समुद्री बेड़ा बनाए रखना है।
2026 में जोन्स एक्ट में छूट वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच दी गई, जो ईरान संघर्ष के कारण उत्पन्न हुआ है। मध्य पूर्व में तनाव के चलते तेल आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई, खासकर होरमुज़ जलसंधि जैसे महत्वपूर्ण मार्ग पर, जो वैश्विक ऊर्जा परिवहन के लिए अत्यंत अहम है।
इस स्थिति को देखते हुए अमेरिकी सरकार ने अस्थायी रूप से जोन्स एक्ट में ढील दी, ताकि विदेशी जहाज भी देश के भीतर ईंधन और आवश्यक वस्तुओं का परिवहन कर सकें। इस कदम का उद्देश्य सप्लाई में रुकावटों को कम करना, लॉजिस्टिक्स में सुधार लाना और अल्पकाल में बढ़ती ईंधन कीमतों को नियंत्रित करना है।
जोन्स एक्ट में दी गई छूट से अमेरिका के भीतर ईंधन परिवहन की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, यह कदम केवल अल्पकालिक राहत प्रदान करता है और व्यापक वैश्विक ऊर्जा संकट का स्थायी समाधान नहीं है।
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