भारत और फ्रांस के बीच हैमर मिसाइल का निर्माण भारत में करने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। हैमर मिसाइल को भारत में संयुक्त रूप से बनाने के लिए दोनों देशों में यह समझौता एआई इम्पैक्ट समिट के लिए भारत आ रहे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के तीन दिवसीय के आधिकारिक यात्रा पर होने की संभावना है। भारत, फ्रांस से 114 अतिरिक्त राफेल खरीदने की भी डील कर रहा है, इस पर वजह से हैमर मिसाइल को भारत में ही बनाने की अहमियत बढ़ गई है। इसके लिए भारत इलेक्ट्रोनिक्स ने फ्रांस की सफ्रान (Safran) के साथ एक साझा कंपनी बनाई है।
हैमर मिसाइल का इस्तेमाल राफेल फाइटर जेट में किया जा रहा है। अंग्रेजी में हैमर (HAMMER) का अर्थ है-हाइली ऐजल मॉड्यूलर म्यूनिशन एक्सटेंडेड रेंज या अत्यधिक फुर्तिला मॉड्यूलर युद्ध-सामग्री विस्तारित रेंज। अभी तक यह फ्रांस से आयात किया जा रहा है, लेकिन नए समझौते के साकार होने के बाद यह भारत में ही बनने लगेगी। भारत में बनने से भारतीय वायु सेना को इसकी तेजी से डिलिवरी मिल सकती है और यह मेक इन इंडिया अभियान के लिए भी उपयुक्त है।
हैमर मिसाइल की हमले की रेंज मोटे तौर पर 60 से 70 किलो मीटर है। इसे पहाड़ी क्षेत्रों में दुश्मन के ठिकानों को बर्बाद करने के लिए बहुत ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है। दुश्मन के बहुत ही मजबूत सुरक्षा वाले बंकरों के लिए तो यह काल का काम करती है। 2007 में पहली बार पेरिस एयर शो में इसे सार्वजनिक किया गया, तब इसका नाम AASM था। लेकिन, 2011 में इसे हैमर नाम दिया गया। यह मध्यम रेंज की हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है।
हैमर मिसाइल हर मौसम में दिन या रात कभी भी दागी जा सकती है। एक राफेल फाइटर जेट में 250 किलो के 6 हैमर मिसाइल लोड की जा सकती हैं, जो 6 अलग-अलग टारगेट को एक ही समय पर निशाना दाग सकती हैं।
हैमर मिसाइल मारो और भूल जाओ वाली सोच पर काम करती है। मतलब, एक बार टारगेट लॉक होने और मिसाइल लॉन्च हो जाने के बाद इसे आगे गाइड करने की जरूत नहीं। 124 से 1,000 किलो की यह मिसाइल स्थिर और चलते हुए दोनों तरहों के टारगेट को निशाना बना सकती है और इसमें जो एडवांस नैविगेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ है, इसकी वजह से इसके चूकने की आशंका लगभग खत्म हो जाती है।
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