भारत ने टिकाऊ शहरी जीवन की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए अपने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन ढांचे को अपडेट किया है। नए नियमों का उद्देश्य लैंडफिल पर दबाव कम करना, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना और अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी श्रृंखला में जवाबदेही सुनिश्चित करना है। पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सख्त अनुपालन प्रावधानों के साथ जोड़कर ये नियम शहरी स्वच्छता और सतत विकास को मजबूती देते हैं।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम 2026 भारत में कचरा प्रबंधन के आधुनिक दृष्टिकोण को अपनाने के लिए तैयार किए गए हैं। संशोधित नियमों में परिपत्र अर्थव्यवस्था और विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) को शामिल किया गया है, जिससे कचरे को बोझ नहीं बल्कि संसाधन के रूप में देखा जा सके। इनका मुख्य फोकस कचरा उत्पादन में कमी, पुनर्चक्रण में सुधार और बेहतर योजना व प्रवर्तन के जरिए लैंडफिल में निपटान को न्यूनतम करना है।
नए नियमों की एक प्रमुख विशेषता स्रोत पर चार-स्तरीय कचरा पृथक्करण को अनिवार्य करना है। अब नागरिकों, बड़े कचरा उत्पादकों और संस्थानों को कचरे को जैव-अपघटनीय, पुनर्चक्रण योग्य, घरेलू खतरनाक तथा स्वच्छता/निष्क्रिय कचरे में अलग-अलग करना होगा। इससे पुनर्चक्रण की दक्षता बढ़ेगी, कचरा धाराओं में मिलावट कम होगी और प्रसंस्करण व निपटान सुविधाओं पर दबाव घटेगा।
SWM नियम 2026 में ‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के आधार पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। पंजीकरण के बिना संचालन, गलत या भ्रामक रिपोर्टिंग और अनुचित कचरा प्रबंधन जैसे मामलों में जुर्माना लगाया जाएगा। इसका उद्देश्य शहरी स्थानीय निकायों, निजी ऑपरेटरों, बड़े कचरा उत्पादकों और निर्माताओं की जवाबदेही तय करना और लापरवाही को हतोत्साहित करना है।
कचरा प्रबंधन अवसंरचना के विकास में भूमि संबंधी देरी को दूर करने के लिए नए नियमों में ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण और निपटान सुविधाओं के आसपास विकास के लिए चरणबद्ध मानदंड तय किए गए हैं। इससे भूमि आवंटन में तेजी, परियोजनाओं में देरी में कमी और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधित कचरा प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा। दीर्घकालिक शहरी स्वच्छता लक्ष्यों के लिए बेहतर अवसंरचना योजना बेहद जरूरी है।
विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व को शामिल कर नियमों ने विशेष रूप से पैकेजिंग कचरे के पूरे जीवनचक्र के लिए उत्पादकों को जिम्मेदार बनाया है। यह भारत की कचरा प्रबंधन नीति को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाता है और पुनर्चक्रण बाजारों, वेस्ट-टू-रिसोर्स तकनीकों में नवाचार तथा लैंडफिल पर निर्भरता में कमी को बढ़ावा देता है। परिपत्र अर्थव्यवस्था का यह दृष्टिकोण सतत उपभोग और उत्पादन पैटर्न को समर्थन देता है।
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