ईरान (Iran) ने अमेरिका-इज़रायल संग जारी युद्ध के बीच दुश्मन जहाज़ों को तबाह करने के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट (Strait Of Hormuz) में समुद्री माइंस (Sea Mines) बिछाई हैं। ईरान युद्ध होने के बाद जब उसने होमुर्ज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया तो ये खबरें फैलने लगीं कि इस रास्ते में उसने समुद्री माइंस बिछा दी हैं। इन खबरों ने तेल टैंकर्स और जहाजों में घबराहट फैला दी। हालांकि ईरान ने फिर इन खबरों का खंडन करते हुए कहा कि उसने ऐसा कुछ नहीं किया है। लेकिन ये जानना चाहिए कि आखिर क्या होती हैं समुद्री माइंस और कैसे काम करती हैं।
समंदर के अंदर माइंस समुद्र में छिपे हुए विस्फोटक हथियार होते हैं, जिन्हें दुश्मन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए पानी के नीचे बिछाया जाता है।
समंदर के अंदर माइंस का एक ही काम है- उसके पास से दुश्मन देश का जो भी जहाज गुजरे, उसे तबाह कर दे। यानी उस माइंस को जहाज के करीब आते ही फटना होता है। अब जो आधुनिक समुद्री माइंस आई हैं, वे केवल टकराने से नहीं फटतीं, बल्कि वे जहाजों की पहचान करने के लिए अलग-अलग सेंसर का उपयोग करती हैं।
समुद्री माइंस या नेवल माइंस समुद्र की गहराइयों में छिपे वे घातक हथियार हैं जो सदियों से नौसैनिक रणनीतियों का अभिन्न अंग बने हुए हैं। ये पानी के नीचे लगाए गए विस्फोटक उपकरण हैं, जो दुश्मन के जहाजों, पनडुब्बियों या यहां तक कि मछली पकड़ने वाली नावों को नष्ट करने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं।
समुद्री माइंस मूल रूप से विस्फोटक चार्ज से लैस डिवाइस होते हैं, जो समुद्र तल पर, पानी की सतह के नीचे या तैरते हुए लगाए जाते हैं। इनका आविष्कार प्राचीन चीन में हुआ था। आधुनिक माइंस में 100 किलोग्राम से लेकर 1,000 किलोग्राम तक का विस्फोटक हो सकता है, जो एक बड़े युद्धपोत को डुबो सकता है या एक तेल टैंकर को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर सकता है।
समुद्री माइंस को बिछाने के लिए तीन मुख्य तरीको का उपयोग किया जाता है। पहला तरीका जहाजों या नावों के जरिए होता है। इसके लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए ‘माइनलेयर’ (Minelayers) जहाजों का इस्तेमाल किया जाता है, जो अपने पिछले हिस्से से माइंस को समुद्र में गिराते हैं। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने ईरान के ऐसी ही 16 माइनलेयर नावों को तबाह करने का दावा किया है।
दूसरा तरीका पनडुब्बियों के जरिए होता है, जिसे सबसे गुप्त माना जाता है। पनडुब्बियां अपने टॉरपीडो ट्यूब के माध्यम से दुश्मन के बंदरगाहों के पास जाकर माइंस बिछा देती हैं। इस तरीके से बिछाई गई माइंस का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है। तीसरा तरीका विमानों के जरिए होता है। युद्ध के वक्त विमानों से पैराशूट की सहायता से दुश्मन के समुद्री रास्तों में माइंस गिराई जाती हैं।
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