विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2026 (21वाँ संस्करण) आने वाले दशक की एक चिंताजनक तस्वीर प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया एक “प्रतिस्पर्धा के युग (Age of Competition)” में प्रवेश कर रही है, जहाँ देशों के बीच प्रतिद्वंद्विता केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार प्रतिबंधों, प्रतिबंधात्मक नीतियों (सैंक्शन्स), प्रौद्योगिकी नियंत्रण और सूचना युद्ध के माध्यम से भी तेज़ हो रही है। इस बदलाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऐसा माहौल बन रहा है जहाँ झटके तेज़ी से फैलते हैं, अंतरराष्ट्रीय सहयोग कठिन होता जा रहा है और समाज अस्थिरता के प्रति अधिक संवेदनशील हो रहे हैं।
रिपोर्ट ने जोखिमों को दो प्रमुख समय-सीमाओं—निकट भविष्य (2 वर्ष) और दीर्घकाल (10 वर्ष)—में वर्गीकृत किया है। इसका मुख्य संदेश स्पष्ट है: वैश्विक परिदृश्य लगातार अधिक खंडित, अधिक अनिश्चित और एक-दूसरे से जुड़े अनेक जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील होता जा रहा है।
WEF के अनुसार, वैश्विक जोखिम वह खतरा या घटना है जो बड़े पैमाने पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है और जिसका असर निम्न पर पड़ता है—
यह परिभाषा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उन खतरों पर ज़ोर दिया गया है जो सीमाओं के पार फैलते हैं, तेज़ी से प्रभाव डालते हैं और विभिन्न क्षेत्रों में श्रृंखलाबद्ध प्रभाव (रिपल इफेक्ट्स) उत्पन्न करते हैं।
यह रिपोर्ट मुख्य रूप से विभिन्न क्षेत्रों के वैश्विक नेताओं और विशेषज्ञों के सर्वेक्षणों के माध्यम से एकत्र की गई विशेषज्ञ धारणाओं पर आधारित है। इसके बाद जोखिमों को निम्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है—
रिपोर्ट यह भी विश्लेषण करती है कि जोखिम एक-दूसरे से कैसे जुड़े हुए हैं। यह दर्शाता है कि संकट अक्सर अलग-थलग नहीं होते, बल्कि एक बड़ी घटना कई अन्य संकटों को उत्प्रेरित कर देती है।
रिपोर्ट का एक प्रमुख निष्कर्ष यह है कि विशेषज्ञों का बड़ा वर्ग निकट भविष्य और दीर्घकाल—दोनों में अधिक उथल-पुथल की आशंका व्यक्त करता है। इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा तनावों को अस्थायी उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि गहरे संरचनात्मक बदलावों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में वैश्विक संकट को जन्म देने वाला सबसे संभावित जोखिम भू-आर्थिक टकराव है।
भू-आर्थिक टकराव का अर्थ
इसका तात्पर्य आर्थिक साधनों को रणनीतिक शक्ति के रूप में इस्तेमाल करने से है, जैसे—
महत्वपूर्ण संसाधनों (तेल, गैस, दुर्लभ खनिज, सेमीकंडक्टर/चिप्स) का रणनीतिक उपयोग या दबाव
यह क्यों खतरनाक है?
भू-आर्थिक प्रतिस्पर्धा—
आर्थिक प्रतिद्वंद्विता के साथ-साथ, रिपोर्ट राज्य-आधारित सशस्त्र संघर्ष को भी एक प्रमुख जोखिम के रूप में रेखांकित करती है। आज के संघर्ष पहले से कहीं अधिक जटिल हो गए हैं, क्योंकि इनमें अक्सर निम्न तत्व एक साथ शामिल होते हैं—
सशस्त्र संघर्ष से जुड़े प्रमुख खतरे
ये कारक न केवल प्रभावित देशों को, बल्कि वैश्विक शांति, आपूर्ति शृंखलाओं और आर्थिक स्थिरता को भी गंभीर चुनौती देते हैं।
रिपोर्ट की सबसे गंभीर चेतावनियों में से एक गलत सूचना (Misinformation) और दुष्प्रचार (Disinformation) के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी है, विशेषकर डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से। रिपोर्ट झूठी जानकारी को सामाजिक अशांति और राजनीतिक विभाजन से सीधे जोड़ती है।
गलत सूचना कैसे वैश्विक खतरा बनती है?
सामाजिक ध्रुवीकरण: एक जुड़ा हुआ जोखिम
ध्रुवीकरण का अर्थ है समाज का गहरे रूप से विभाजित हो जाना, जहाँ लोग कठोर समूहों में बँट जाते हैं और एक-दूसरे पर भरोसा करना छोड़ देते हैं।
इसके परिणामस्वरूप—
रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक जोखिमों का महत्व तेज़ी से बढ़ रहा है, जो आने वाले समय में गंभीर चुनौतियों का संकेत देता है।
प्रमुख आर्थिक जोखिम
ये जोखिम क्यों बढ़ रहे हैं?
इनके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं—
लंबे समय तक चलने वाली आर्थिक मंदी सामाजिक असंतोष, बेरोज़गारी और राजनीतिक अस्थिरता को और अधिक बढ़ा सकती है, जिससे वैश्विक जोखिम एक-दूसरे को और तीव्रता से प्रभावित करेंगे।
डिजिटल युग में साइबर असुरक्षा सबसे तात्कालिक वैश्विक जोखिमों में से एक बन गई है।
साइबर खतरों का प्रभाव
साइबर जोखिम क्यों बढ़ रहा है?
साइबर हमले न केवल भारी आर्थिक नुकसान पहुँचा सकते हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी गंभीर रूप से झकझोर सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीकों के प्रतिकूल परिणाम दीर्घकालीन सबसे गंभीर जोखिमों में से हैं।
एआई से जुड़े प्रमुख जोखिम
एआई को दोधारी तकनीक के रूप में वर्णित किया गया है—यह उत्पादकता बढ़ा सकती है, लेकिन मजबूत सुरक्षा उपायों के बिना, यह विश्वास, स्थिरता और जवाबदेही को कमजोर भी कर सकती है।
दीर्घकालिक जोखिम रैंकिंग में पर्यावरणीय खतरों का प्रभुत्व है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु जोखिम केवल जारी नहीं हैं, बल्कि तीव्र होते जा रहे हैं।
प्रमुख पर्यावरणीय जोखिम (दीर्घकालिक)
यह क्यों चिंताजनक है
पर्यावरणीय क्षति श्रृंखलाबद्ध प्रभाव उत्पन्न करती है—
रिपोर्ट चेतावनी देती है कि जलवायु दबाव एक गुणक (Multiplier) बन सकता है, जिससे आर्थिक और राजनीतिक जोखिम और भी गंभीर हो जाएंगे।
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि असमानता (Inequality) सबसे “जुड़ा हुआ” जोखिम है, अर्थात यह कई अन्य खतरों को उत्तेजित या मजबूत करती है।
असमानता बढ़ाती है—
इससे स्पष्ट होता है कि असमानता केवल सामाजिक समस्या नहीं है, बल्कि यह शासन और स्थिरता का भी मुद्दा है।
रिपोर्ट के अनुसार, विश्व अब एकल प्रमुख शक्ति संरचना से हट रहा है। भविष्य को यह दृष्टि देती है कि दुनिया होगी—
इससे संभावित परिणाम
इस खंडित और बहुध्रुवीय संरचना के कारण सामूहिक कार्रवाई कठिन हो जाएगी—विशेष रूप से जलवायु, वैश्विक स्वास्थ्य और संघर्ष निवारण के मुद्दों पर।
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