WEF ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2026, पूरी रिपोर्ट की समरी देखें

विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2026 (21वाँ संस्करण) आने वाले दशक की एक चिंताजनक तस्वीर प्रस्तुत करती है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया एक “प्रतिस्पर्धा के युग (Age of Competition)” में प्रवेश कर रही है, जहाँ देशों के बीच प्रतिद्वंद्विता केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापार प्रतिबंधों, प्रतिबंधात्मक नीतियों (सैंक्शन्स), प्रौद्योगिकी नियंत्रण और सूचना युद्ध के माध्यम से भी तेज़ हो रही है। इस बदलाव के कारण वैश्विक स्तर पर ऐसा माहौल बन रहा है जहाँ झटके तेज़ी से फैलते हैं, अंतरराष्ट्रीय सहयोग कठिन होता जा रहा है और समाज अस्थिरता के प्रति अधिक संवेदनशील हो रहे हैं।

रिपोर्ट ने जोखिमों को दो प्रमुख समय-सीमाओं—निकट भविष्य (2 वर्ष) और दीर्घकाल (10 वर्ष)—में वर्गीकृत किया है। इसका मुख्य संदेश स्पष्ट है: वैश्विक परिदृश्य लगातार अधिक खंडित, अधिक अनिश्चित और एक-दूसरे से जुड़े अनेक जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील होता जा रहा है।

1) “वैश्विक जोखिम” से WEF का क्या आशय है?

WEF के अनुसार, वैश्विक जोखिम वह खतरा या घटना है जो बड़े पैमाने पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है और जिसका असर निम्न पर पड़ता है—

  • विश्व की जनसंख्या
  • वैश्विक अर्थव्यवस्था
  • प्राकृतिक संसाधन और पारिस्थितिक तंत्र

यह परिभाषा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें उन खतरों पर ज़ोर दिया गया है जो सीमाओं के पार फैलते हैं, तेज़ी से प्रभाव डालते हैं और विभिन्न क्षेत्रों में श्रृंखलाबद्ध प्रभाव (रिपल इफेक्ट्स) उत्पन्न करते हैं।

2) रिपोर्ट कैसे तैयार की जाती है?

यह रिपोर्ट मुख्य रूप से विभिन्न क्षेत्रों के वैश्विक नेताओं और विशेषज्ञों के सर्वेक्षणों के माध्यम से एकत्र की गई विशेषज्ञ धारणाओं पर आधारित है। इसके बाद जोखिमों को निम्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है—

  • भू-राजनीतिक
  • आर्थिक
  • सामाजिक
  • प्रौद्योगिकीय
  • पर्यावरणीय

रिपोर्ट यह भी विश्लेषण करती है कि जोखिम एक-दूसरे से कैसे जुड़े हुए हैं। यह दर्शाता है कि संकट अक्सर अलग-थलग नहीं होते, बल्कि एक बड़ी घटना कई अन्य संकटों को उत्प्रेरित कर देती है।

3) वैश्विक माहौल: अस्थिरता में वृद्धि

रिपोर्ट का एक प्रमुख निष्कर्ष यह है कि विशेषज्ञों का बड़ा वर्ग निकट भविष्य और दीर्घकाल—दोनों में अधिक उथल-पुथल की आशंका व्यक्त करता है। इससे संकेत मिलता है कि मौजूदा तनावों को अस्थायी उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि गहरे संरचनात्मक बदलावों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

  • बढ़ती अस्थिरता के प्रमुख कारण
  • प्रमुख शक्तियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए सिमटता स्थान
  • उच्च ऋण और असमान विकास जैसी आर्थिक चुनौतियाँ
  • तेज़ प्रौद्योगिकीय व्यवधान
  • जलवायु प्रभावों की तीव्रता में वृद्धि

4) 2026 में संभावित सबसे बड़ा संकट कारक: भू-आर्थिक टकराव

रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में वैश्विक संकट को जन्म देने वाला सबसे संभावित जोखिम भू-आर्थिक टकराव है।

भू-आर्थिक टकराव का अर्थ

इसका तात्पर्य आर्थिक साधनों को रणनीतिक शक्ति के रूप में इस्तेमाल करने से है, जैसे—

  • प्रतिबंध और जवाबी प्रतिबंध (Sanctions & Counter-sanctions)
  • शुल्क (टैरिफ) और व्यापार बाधाएँ
  • प्रौद्योगिकी निर्यात पर प्रतिबंध
  • आपूर्ति शृंखलाओं पर नियंत्रण

महत्वपूर्ण संसाधनों (तेल, गैस, दुर्लभ खनिज, सेमीकंडक्टर/चिप्स) का रणनीतिक उपयोग या दबाव

यह क्यों खतरनाक है?

भू-आर्थिक प्रतिस्पर्धा—

  • वैश्विक व्यापार नेटवर्क को बाधित करती है
  • महँगाई के दबाव बढ़ाती है
  • निवेशकों के भरोसे को कमजोर करती है
  • वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को अस्थिर बनाती है
  • उद्योगों और रोज़गार के लिए अनिश्चितता पैदा करती है

5) संघर्ष और सुरक्षा: सशस्त्र टकराव के बढ़ते जोखिम

आर्थिक प्रतिद्वंद्विता के साथ-साथ, रिपोर्ट राज्य-आधारित सशस्त्र संघर्ष को भी एक प्रमुख जोखिम के रूप में रेखांकित करती है। आज के संघर्ष पहले से कहीं अधिक जटिल हो गए हैं, क्योंकि इनमें अक्सर निम्न तत्व एक साथ शामिल होते हैं—

  • पारंपरिक युद्ध
  • साइबर हमले
  • आर्थिक प्रतिबंध
  • सूचना का दुरुपयोग और दुष्प्रचार

सशस्त्र संघर्ष से जुड़े प्रमुख खतरे

  • बुनियादी ढाँचे और ऊर्जा नेटवर्क को नुकसान
  • वैश्विक वस्तु कीमतों में अस्थिरता
  • विस्थापन और प्रवासन में वृद्धि
  • विकास व्यय की कीमत पर सैन्य खर्च में बढ़ोतरी

ये कारक न केवल प्रभावित देशों को, बल्कि वैश्विक शांति, आपूर्ति शृंखलाओं और आर्थिक स्थिरता को भी गंभीर चुनौती देते हैं।

6) सूचना संकट: दुष्प्रचार, गलत सूचना और ध्रुवीकरण

रिपोर्ट की सबसे गंभीर चेतावनियों में से एक गलत सूचना (Misinformation) और दुष्प्रचार (Disinformation) के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी है, विशेषकर डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से। रिपोर्ट झूठी जानकारी को सामाजिक अशांति और राजनीतिक विभाजन से सीधे जोड़ती है।

गलत सूचना कैसे वैश्विक खतरा बनती है?

  • संकटों (महामारी, युद्ध, आपदाएँ) के दौरान भ्रम फैलाती है
  • सरकारों और मीडिया पर भरोसा कम करती है
  • समुदायों में डर और ग़ुस्सा पैदा करती है
  • चुनावों और जन-निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित करती है

सामाजिक ध्रुवीकरण: एक जुड़ा हुआ जोखिम

ध्रुवीकरण का अर्थ है समाज का गहरे रूप से विभाजित हो जाना, जहाँ लोग कठोर समूहों में बँट जाते हैं और एक-दूसरे पर भरोसा करना छोड़ देते हैं।

इसके परिणामस्वरूप—

  • लगातार विरोध-प्रदर्शन और अस्थिरता
  • नीति-निर्माण और शासन की कमजोरी
  • समुदायों के बीच बढ़ती शत्रुता
  • सामाजिक सौहार्द का क्षरण

7) आर्थिक जोखिम: संभावित बड़े संकट के संकेत

रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक जोखिमों का महत्व तेज़ी से बढ़ रहा है, जो आने वाले समय में गंभीर चुनौतियों का संकेत देता है।

प्रमुख आर्थिक जोखिम

  • आर्थिक मंदी
  • महँगाई का पुनरुत्थान
  • एसेट बबल (संपत्ति बुलबुला) का खतरा
  • अमीर–गरीब के बीच बढ़ती खाई

ये जोखिम क्यों बढ़ रहे हैं?

इनके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं—

  • सार्वजनिक और निजी ऋण का ऊँचा स्तर
  • अस्थिर वैश्विक व्यापार प्रवाह
  • मुद्राओं और ब्याज दरों पर दबाव
  • वित्तीय बाज़ारों में उतार-चढ़ाव

लंबे समय तक चलने वाली आर्थिक मंदी सामाजिक असंतोष, बेरोज़गारी और राजनीतिक अस्थिरता को और अधिक बढ़ा सकती है, जिससे वैश्विक जोखिम एक-दूसरे को और तीव्रता से प्रभावित करेंगे।

8) साइबर असुरक्षा: महत्वपूर्ण प्रणालियों के लिए सीधा खतरा

डिजिटल युग में साइबर असुरक्षा सबसे तात्कालिक वैश्विक जोखिमों में से एक बन गई है।

साइबर खतरों का प्रभाव

  • बैंकिंग और वित्तीय प्रणालियाँ
  • बिजली ग्रिड और ऊर्जा आपूर्ति
  • रेलवे और विमानन नेटवर्क
  • अस्पताल और स्वास्थ्य डेटा
  • सरकारी डेटाबेस
  • सैन्य प्रणालियाँ

साइबर जोखिम क्यों बढ़ रहा है?

  • डिजिटल निर्भरता में तेज़ वृद्धि
  • रैनसमवेयर हमलों का फैलाव
  • राज्य-प्रायोजित साइबर अभियान
  • कई क्षेत्रों में कमजोर साइबर सुरक्षा क्षमताएँ

साइबर हमले न केवल भारी आर्थिक नुकसान पहुँचा सकते हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी गंभीर रूप से झकझोर सकते हैं।

9) एआई जोखिम: शक्तिशाली, तेज़—और नियंत्रण में कठिन

रिपोर्ट में कहा गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तकनीकों के प्रतिकूल परिणाम दीर्घकालीन सबसे गंभीर जोखिमों में से हैं।

एआई से जुड़े प्रमुख जोखिम

  • डीपफेक्स और स्वचालित गलत सूचना (Misinformation)
  • कई उद्योगों में नौकरी का विस्थापन
  • एल्गोरिदमिक पूर्वाग्रह और भेदभाव
  • निगरानी और गोपनीयता का उल्लंघन
  • स्वायत्त हथियार और एआई-संचालित युद्ध
  • एआई शक्ति का कुछ हाथों में केंद्रित होना

एआई को दोधारी तकनीक के रूप में वर्णित किया गया है—यह उत्पादकता बढ़ा सकती है, लेकिन मजबूत सुरक्षा उपायों के बिना, यह विश्वास, स्थिरता और जवाबदेही को कमजोर भी कर सकती है।

10) पर्यावरणीय जोखिम: सबसे खतरनाक दीर्घकालिक खतरा

दीर्घकालिक जोखिम रैंकिंग में पर्यावरणीय खतरों का प्रभुत्व है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु जोखिम केवल जारी नहीं हैं, बल्कि तीव्र होते जा रहे हैं।

प्रमुख पर्यावरणीय जोखिम (दीर्घकालिक)

  • अत्यधिक मौसम घटनाएँ
  • जैव विविधता की हानि और पारिस्थितिकी तंत्र का पतन
  • पृथ्वी प्रणाली में गंभीर परिवर्तन
  • प्रदूषण
  • संसाधनों की कमी (जल, भोजन, खनिज)

यह क्यों चिंताजनक है

पर्यावरणीय क्षति श्रृंखलाबद्ध प्रभाव उत्पन्न करती है—

  • फसल विफलता और खाद्य असुरक्षा
  • जल संकट और संघर्ष
  • बलपूर्वक विस्थापन
  • आर्थिक झटके
  • स्वास्थ्य आपात स्थितियों में वृद्धि

रिपोर्ट चेतावनी देती है कि जलवायु दबाव एक गुणक (Multiplier) बन सकता है, जिससे आर्थिक और राजनीतिक जोखिम और भी गंभीर हो जाएंगे।

11) असमानता: सबसे अधिक जुड़ा हुआ वैश्विक जोखिम

रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि असमानता (Inequality) सबसे “जुड़ा हुआ” जोखिम है, अर्थात यह कई अन्य खतरों को उत्तेजित या मजबूत करती है।

असमानता बढ़ाती है—

  • राजनीतिक असंतोष
  • अपराध और असुरक्षा
  • सामाजिक अशांति
  • ध्रुवीकरण
  • प्रवासन दबाव
  • संस्थाओं में भरोसे की कमी

इससे स्पष्ट होता है कि असमानता केवल सामाजिक समस्या नहीं है, बल्कि यह शासन और स्थिरता का भी मुद्दा है।

12) भविष्य का विश्व क्रम: बहुध्रुवीय और खंडित

रिपोर्ट के अनुसार, विश्व अब एकल प्रमुख शक्ति संरचना से हट रहा है। भविष्य को यह दृष्टि देती है कि दुनिया होगी—

  • बहुध्रुवीय (Multipolar): कई प्रमुख शक्तियाँ
  • खंडित (Fragmented): विभिन्न क्षेत्र अलग-अलग नियम लागू करेंगे

इससे संभावित परिणाम

  • प्रतिस्पर्धी व्यापार ब्लॉक्स
  • कई तकनीकी इकोसिस्टम
  • वैश्विक नियमों में असंगति
  • अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की प्रभावशीलता में कमी

इस खंडित और बहुध्रुवीय संरचना के कारण सामूहिक कार्रवाई कठिन हो जाएगी—विशेष रूप से जलवायु, वैश्विक स्वास्थ्य और संघर्ष निवारण के मुद्दों पर।

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vikash

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