संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद-निरोधक कार्यालय (UNOCT) ने 28 अप्रैल 2025 को Victims of Terrorism Advocacy Network (VoTAN) की औपचारिक शुरुआत की। यह एक ऐतिहासिक पहल है जिसका उद्देश्य आतंकवादी घटनाओं से प्रभावित व्यक्तियों और समुदायों के लिए एक सहायक, सुरक्षित और सशक्त मंच प्रदान करना है।
VoTAN की नींव सितंबर 2022 में आयोजित पहले यूएन ग्लोबल कांग्रेस ऑफ विक्टिम्स ऑफ टेररिज़्म में रखी गई थी। यह पहल उसी ऐतिहासिक सम्मेलन का एक प्रमुख परिणाम है, जिसमें पीड़ितों, नीति निर्माताओं, नागरिक समाज और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
VoTAN का विकास स्पेन और इराक के सह-अध्यक्षता वाले समूह द्वारा किया गया, जो पिछले छह वर्षों से पीड़ितों के अधिकारों की वैश्विक स्तर पर रक्षा करने और उनकी आवाज़ को स्थान दिलाने के लिए काम कर रहा है।
VoTAN की स्थापना में स्पेन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेष रूप से वित्तीय सहायता प्रदान करके। उद्घाटन समारोह में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि पीड़ितों की मानसिक और शारीरिक ज़रूरतों के लिए अधिक वित्तीय समर्थन और वैश्विक एकजुटता आवश्यक है।
VoTAN एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है जो पीड़ितों, बचे हुए लोगों, वकालत समूहों और नागरिक समाज संगठनों को जोड़ता है, ताकि वे अपनी कहानियाँ साझा कर सकें और आपसी समर्थन पा सकें।
सुरक्षित स्थान बनाना: जहाँ पीड़ित बिना डर के अपनी बात कह सकें और सामूहिक रूप से उपचार की प्रक्रिया से गुजर सकें।
संकट सहनशीलता विकसित करना: व्यक्तियों और संस्थाओं को दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने में सक्षम बनाना।
वकालत को सशक्त करना: पीड़ितों को नेतृत्वकारी भूमिका देकर उन्हें नीतिगत सुधारों और शांति प्रयासों में भागीदार बनाना।
शिक्षा और जागरूकता फैलाना: कार्यशालाओं और अभियानों के ज़रिए आतंकवाद के प्रभावों के बारे में लोगों को शिक्षित करना।
शांति निर्माण को बढ़ावा देना: पीड़ितों की कहानियाँ साझा कर समाज में सहिष्णुता, समझ और सुलह को प्रोत्साहित करना।
दुनिया भर में चरमपंथ के बढ़ते खतरे और आतंकवाद की जटिलता को देखते हुए, VoTAN एक नया दृष्टिकोण पेश करता है। यह पीड़ितों को केवल सहायता प्राप्तकर्ता न मानते हुए, उन्हें परिवर्तन, शांति और न्याय के सक्रिय प्रतिनिधि के रूप में स्थापित करता है।
VoTAN के उद्घाटन समारोह के दौरान कई पीड़ितों और संगठनों ने अपनी भावनात्मक और प्रेरणादायक कहानियाँ साझा कीं। इन अनुभवों ने यह स्पष्ट किया कि ऐसे वैश्विक मंचों की कितनी आवश्यकता है, जहाँ पीड़ितों को न केवल समर्थन मिले, बल्कि उनकी आवाज़ें भी शांति प्रक्रियाओं में सुनी जाएं।
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