वरिष्ठ उर्दू समाचार वाचक सलीम अख्तर का 76 वर्ष की आयु में निधन

नई दिल्ली, 13 जून – आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) के प्रतिष्ठित उर्दू समाचार वाचक सलीम अख्तर का आज नई दिल्ली में एक संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 76 वर्ष के थे। उनके निधन के साथ भारतीय रेडियो प्रसारण जगत ने अपनी सबसे पहचानने योग्य और सम्मानित आवाज़ों में से एक को खो दिया है।

दो दशकों से अधिक का गौरवशाली करियर

सलीम अख्तर लगभग 25 वर्षों तक आकाशवाणी के समाचार सेवा प्रभाग के उर्दू अनुभाग से जुड़े रहे। अपने करियर के दौरान वे स्पष्ट उच्चारण, उर्दू भाषा पर सशक्त पकड़, और गंभीर, प्रभावशाली आवाज़ के लिए व्यापक रूप से सराहे गए।

उनकी आवाज़ विशेष रूप से उर्दू भाषी श्रोताओं के बीच घर-घर में पहचानी जाने वाली बन गई थी। पीढ़ियों ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार अत्यंत शालीनता और सटीकता के साथ पढ़ते हुए सुना, जिससे वे रेडियो श्रोताओं के दिलों में स्थायी स्थान बना गए।

बदलाव के समय में एक विश्वसनीय आवाज़

अपने कार्यकाल के दौरान सलीम अख्तर ने चुनावों, आर्थिक सुधारों, प्राकृतिक आपदाओं और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय घटनाओं जैसे भारत के समकालीन इतिहास के कई निर्णायक क्षणों की रिपोर्टिंग की। वे समाचारों को निष्पक्षता, शांति और भाषाई सुंदरता के साथ प्रस्तुत करने की अपनी कला के लिए जाने जाते थे।

वे केवल एक समाचार वाचक नहीं थे, बल्कि एक सांस्कृतिक हस्ती भी थे, जिन्होंने आधुनिक समय में उर्दू प्रसारण को प्रासंगिक और जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रस्तुति में अक्सर एक काव्यात्मक गुणवत्ता झलकती थी, जो उर्दू भाषा के प्रति उनके गहरे प्रेम को दर्शाती थी।

मीडिया जगत में शोक की लहर

उनके निधन की खबर फैलते ही विभिन्न मंचों पर पत्रकारों, सहकर्मियों और प्रशंसकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। कई लोगों ने उन्हें एक नम्र और समर्पित पेशेवर के रूप में याद किया, जो हमेशा अपने कनिष्ठ साथियों का मार्गदर्शन करने को तत्पर रहते थे।

ऑल इंडिया रेडियो के पूर्व सहयोगियों ने याद किया कि कैसे सलीम अख्तर की उपस्थिति स्टूडियो के वातावरण को गरिमा से भर देती थी, और कैसे उनकी समाचार वाचन शैली उर्दू समाचार प्रसारण के लिए मानक बन गई थी।

उर्दू पत्रकारिता के लिए एक व्यक्तिगत क्षति

पेशेवर उपलब्धियों से परे, सलीम अख्तर को एक विनम्र, शालीन और संस्कारी व्यक्ति के रूप में भी याद किया जाएगा, जो पत्रकारिता में उर्दू भाषा की गरिमा और संरक्षण के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहे।

उनका निधन केवल एक वरिष्ठ समाचार वाचक की मृत्यु नहीं है, बल्कि उर्दू प्रसारण के एक युग का अंत है — वह युग जहाँ शब्दों की आवाज़ में कविता और प्रभाव दोनों समाहित थे।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

व्यापार सूचकांकों का आधार वर्ष बदलकर 2022-23 किया गया

भारत सरकार ने भारत के मर्चेंडाइज ट्रेड इंडेक्स (Merchandise Trade Indices) का आधार वर्ष 2012-13…

1 day ago

कौन हैं आशा शर्मा? जो संभालेंगी Microsoft Gaming की कमान

माइक्रोसॉफ्ट ने 2026 में एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन के तहत भारतीय मूल की अधिकारी आशा…

1 day ago

हरशरण कौर त्रेहन PSPCL की पहली महिला डायरेक्टर (कमर्शियल) बनीं

हरशरण कौर त्रेहन को पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (PSPCL) में निदेशक (वाणिज्यिक) नियुक्त किया…

1 day ago

रेलवे हुआ स्मार्ट! शिकायत निवारण और भीड़ प्रबंधन के लिए एआई-सक्षम ऐप्स की शुरुआत

भारतीय रेलवे ने शिकायत निवारण, टिकट कन्फर्मेशन की भविष्यवाणी, हाउसकीपिंग सेवाओं और भीड़ प्रबंधन को…

1 day ago

मेड इन इंडिया: नड्डा ने कसौली सेंटर में स्वदेशी टीडी वैक्सीन लॉन्च की

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल प्रदेश के सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट में देश…

2 days ago