उन्हें 1988 में ‘बारी बदले जाय’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वह रवींद्र पुरस्कार, आनंद पुरस्कार और रवींद्रनाथ टैगोर मेमोरियल अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार के भी प्राप्तकर्ता थे. उनकी आखिरी पुस्तक, ‘हारानो खटा’ 2015 में प्रकाशित हुई थी.
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