वीर बाल दिवस 2025: जानें क्या है इसका इतिहास?

वीर बाल दिवस भारत में राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण दिवस है, जो भारतीय इतिहास में बच्चों द्वारा दिखाए गए अद्वितीय साहस और बलिदान की याद दिलाता है। यह दिवस गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबज़ादों—विशेष रूप से उनके छोटे पुत्रों—के सर्वोच्च बलिदान को सम्मान देता है, जिन्होंने अपने धर्म और सिद्धांतों की रक्षा के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। यह स्मरण भारतीय इतिहास और नैतिक मूल्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वीर बाल दिवस क्या है और कब मनाया जाता है?

  • वीर बाल दिवस प्रतिवर्ष 26 दिसंबर को पूरे भारत में मनाया जाता है।
  • यह तिथि साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह और साहिबज़ादा फ़तेह सिंह की शहादत की स्मृति में है।
  • वर्ष 1705 में मुगल शासकों द्वारा धर्म परिवर्तन से इनकार करने पर उन्हें शहीद किया गया था।
  • भारत सरकार ने 2022 में इस दिवस की औपचारिक घोषणा की, ताकि बच्चों और युवाओं में धर्म (धार्मिकता), साहस और बलिदान के मूल्यों का प्रसार हो।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: गुरु गोबिंद सिंह जी और साहिबज़ादे

गुरु गोबिंद सिंह जी, सिखों के दसवें गुरु, एक महान आध्यात्मिक नेता, योद्धा, कवि और दार्शनिक थे। उन्होंने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की, जिसने समानता, न्याय और अत्याचार के विरुद्ध प्रतिरोध की भावना को सुदृढ़ किया।

गुरु गोबिंद सिंह जी के चार पुत्र, जिन्हें सामूहिक रूप से साहिबज़ादे कहा जाता है—

  • साहिबज़ादा अजीत सिंह
  • साहिबज़ादा जुझार सिंह
  • साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह
  • साहिबज़ादा फ़तेह सिंह

18वीं शताब्दी की शुरुआत में पंजाब में सिखों पर मुगल शासन का अत्याचार बढ़ गया, और गुरु गोबिंद सिंह जी तथा उनका परिवार इसके प्रमुख लक्ष्य बने।

बड़े साहिबज़ादों की शहादत

  • 1705 में आनंदपुर साहिब की घेराबंदी के दौरान गुरु जी अपने परिवार से बिछुड़ गए।
  • उनके बड़े पुत्र साहिबज़ादा अजीत सिंह (18 वर्ष) और साहिबज़ादा जुझार सिंह (14 वर्ष) ने चमकौर के युद्ध में मुगल सेना से वीरतापूर्वक लड़ते हुए शहादत प्राप्त की।
  • उनका बलिदान वीरता, कर्तव्य और अदम्य साहस का प्रतीक है।

छोटे साहिबज़ादों का हृदयविदारक बलिदान

  • इसके बाद सबसे करुण प्रसंग सामने आया। माता गुजरी के साथ साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह (9 वर्ष) और साहिबज़ादा फ़तेह सिंह (7 वर्ष) को सरहिंद में मुगल सूबेदार वज़ीर ख़ान ने बंदी बना लिया।
  • उन्हें बार-बार इस्लाम स्वीकार करने के लिए दबाव डाला गया, परंतु कम आयु होने के बावजूद उन्होंने धर्म त्यागने से इंकार कर दिया।
  • दंडस्वरूप उन्हें दीवार में जिंदा चिनवा दिया गया; दीवार गिरने के बाद उन्हें शहीद कर दिया गया।
  • अपने पौत्रों की शहादत का समाचार सुनकर माता गुजरी ने भी प्राण त्याग दिए। यह घटना भारतीय इतिहास के सबसे मार्मिक और प्रेरक अध्यायों में से एक है।

वीर बाल दिवस क्यों घोषित किया गया?

2022 में वीर बाल दिवस की घोषणा का उद्देश्य—

  • भारत के स्वतंत्रता एवं धार्मिक संघर्षों में बच्चों के बलिदान को उजागर करना
  • विद्यार्थियों में निडरता, आस्था और नैतिक दृढ़ता के मूल्य विकसित करना
  • साहिबज़ादों की गाथा को राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बनाना, न कि केवल किसी एक समुदाय तक सीमित रखना
  • इस दिन स्कूलों, कॉलेजों, गुरुद्वारों और सांस्कृतिक संस्थानों में सेमिनार, कथावाचन, प्रदर्शनी और वाद-विवाद आयोजित किए जाते हैं।

मुख्य बिंदु

  • वीर बाल दिवस: 26 दिसंबर
  • घोषणा: भारत सरकार, 2022
  • स्मरण: साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह और साहिबज़ादा फ़तेह सिंह की शहादत
  • संबंध: गुरु गोबिंद सिंह जी और खालसा परंपरा
  • महत्त्व: करंट अफेयर्स, इतिहास और नैतिक शिक्षा के लिए उपयोगी
  • संदेश: साहस, सत्य और आस्था—भय से ऊपर हैं
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vikash

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