उत्तराखंड सरकार ने ‘Waste to Energy’ नामक एक पहल के तहत राज्य में उत्पन्न कचरे से बिजली बनाने का फैसला किया है. उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UEPPCB) के अनुसार, इस कचरे से 5 मेगावाट बिजली पैदा हो सकती है और प्रदूषण पर अंकुश लग सकता है. इस योजना का उद्देश्य पहाड़ी प्रदेश में ठोस कचरे के निपटान के लिए लैंडफिल की अनुपलब्धता की समस्या को हल करना है, प्रदेश में 13 में से 10 जिले पहाड़ी क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं.
राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पहाड़ी राज्य में हर दिन 900 टन कचरा पैदा होता है. उत्पन्न कुल कचरे में से आधा प्रकृति में जैविक है, जबकि 17 प्रतिशत एक recyclable श्रेणी में आता है और इसके बाद 21 प्रतिशत जैव चिकित्सा अपशिष्ट और 11 प्रतिशत inert nature है जो material waste का निर्माण कर रहा है. पेट्रोलियम कोक पेटकोक भी कहा जाता है जो एक अंतिम ठोस उपोत्पाद है जो तेल शोधन प्रक्रिया से प्राप्त होता है और कार्बन में बहुत समृद्ध है.
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