केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा ने उत्तर प्रदेश में नए पीएमडीके का उद्घाटन किया

उत्तर प्रदेश के बदायूं स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में 75वाँ प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र (PMDK) स्थापित किया जाएगा। इस केंद्र का उद्घाटन केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा करेंगे। यह केंद्र दिव्यांगजनों (विकलांग व्यक्तियों) और वरिष्ठ नागरिकों को महत्वपूर्ण सहायता सेवाएँ प्रदान करेगा, जिससे उन्हें अब घर के पास ही ज़रूरी सहायता मिल सकेगी।

बदायूं में उद्घाटन समारोह
बदायूं का यह नया PMDK केंद्र केंद्र सरकार की उस पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दिव्यांगजनों और बुज़ुर्गों तक सीधी पहुँच बनाना है। उद्घाटन समारोह सरकारी मेडिकल कॉलेज, बदायूं में आयोजित होगा, जिसमें केंद्रीय मंत्री श्री बी.एल. वर्मा मुख्य अतिथि होंगे। इसके अलावा सामाजिक न्याय मंत्रालय, एएलआईएमसीओ (Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India) और जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

यह कार्यक्रम सरकार के ‘सुगम भारत, सशक्त भारत‘ मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ कोई भी नागरिक अपंगता या उम्र के कारण पीछे न छूटे।

PMDK में मिलने वाली सेवाएँ
प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र (PMDK) एक विशेष केंद्र है जहाँ दिव्यांगजन और बुज़ुर्ग एक ही स्थान पर मूल्यांकन, परामर्श, सहायक उपकरणों का वितरण और फॉलो-अप देखभाल जैसी सेवाएँ प्राप्त कर सकते हैं। यह केंद्र दो प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत सहायता प्रदान करेगा:

  • ADIP योजना – दिव्यांगजनों के लिए

  • राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY) – वरिष्ठ नागरिकों के लिए

इन योजनाओं के तहत लाभार्थियों को वॉकर, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, श्रवण यंत्र, कृत्रिम अंग जैसे सहायक उपकरण निःशुल्क प्रदान किए जाएँगे।

अब तक का प्रभाव और सरकारी प्रतिक्रिया
इस नए केंद्र के साथ, भारत में संचालित प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्रों की संख्या 75 हो गई है। अब तक इन केंद्रों के माध्यम से 1.40 लाख से अधिक लोगों को सहायता दी गई है और ₹179.15 लाख मूल्य के सहायक उपकरण वितरित किए जा चुके हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने बताया कि इन सेवाओं को लोगों के निकट लाने का उद्देश्य यात्रा की परेशानी को कम करना और जीवन को सुगम बनाना है।

यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण समुदायों द्वारा सराही जा रही है, जहाँ पहले लोगों को ऐसी सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, लेकिन अब सहायता उनके द्वार तक पहुँच रही है।

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vikash

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