विश्व की पहली वैदिक घड़ी काल गणना के केंद्र माने गए मध्य प्रदेश में उज्जैन के जंतर-मंतर यानी जीवाजी वेधशाला में अगले वर्ष 22 मार्च को गुड़ी पड़वा यानी नव संवत्सरारंभ पर लगाई जाएगी। जिस टावर पर घड़ी लगेगी, उसके निर्माण कार्य का भूमि पूजन प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री डा. मोहन यादव और महापौर मुकेश टटवाल ने किया। इस क्लाक टावर का निर्माण एक करोड़ 58 लाख रुपये से किया जाएगा।
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घड़ी वैदिक काल गणना के सिद्धांतों पर स्थिर होगी। यह प्रतिदिन देश-विदेश में अलग-अलग समय पर होने वाले सूर्योदय को भी सिंक्रोनाइज करेगी। वैदिक घड़ी के एप्लीकेशन में विक्रम पंचांग भी समाहित रहेगा, जो सूर्योदय से सूर्यास्त की जानकारी के साथ ग्रह, योग, भद्रा, चंद्र स्थिति, नक्षत्र, चौघड़िया, सूर्यग्रहण, चंद्रग्रहण की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएगा। वैदिक घड़ी एप के जरिए मोबाइल पर भी देखी जा सकेगी।
घड़ी के बैकग्राउंड ग्राफिक्स में सभी ज्योतिर्लिंग, नवग्रह, राशि चक्र रहेंगे। टावर का निर्माण उज्जैन इंजीनियरिंग कालेज द्वारा मुहैया ड्राइंग-डिजाइन के अनुसार नगर निगम द्वारा कराया जाएगा। घड़ी की स्थापना विक्रमादित्य शोध पीठ द्वारा की जाएगी। शोध पीठ घड़ी का मोबाइल एप भी बनवाएगी। यह घड़ी न सिर्फ उज्जैन, बल्कि विश्व के लिए बड़ी सौगात होगी। मंत्री डा. मोहन यादव ने कहा कि घड़ी के टावर के ऊपर टेलीस्कोप भी लगवाएंगे, ताकि रात में आकाश में होने वाली खगोलीय घटनाओं का नजारा देखा जा सके।
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