UIDAI ने डेटा-आधारित नवाचारों के माध्यम से आधार की मज़बूती, सुरक्षा और विश्वसनीयता बढ़ाने हेतु ISI के साथ 5-वर्षीय अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास समझौते पर हस्ताक्षर

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने आधार की सुरक्षा, विश्वसनीयता और तकनीकी क्षमताओं को और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत यूआईडीएआई ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) के साथ पाँच वर्ष का अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) समझौता किया है। यह समझौता दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणालियों में से एक, आधार, में डेटा-आधारित नवाचार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से किया गया है।

यह समझौता 12 अगस्त 2025 को हस्ताक्षरित हुआ, जिसमें अत्याधुनिक तकनीकों—जैसे बायोमेट्रिक्स, धोखाधड़ी का पता लगाना, डेटा विश्लेषण और एल्गोरिथ्म उन्नयन—पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि 130 करोड़ से अधिक नागरिकों के लिए आधार की प्रभावशीलता और भरोसेमंदता को बढ़ाया जा सके।

समझौते के मुख्य फोकस क्षेत्र
यह बहुआयामी साझेदारी कई उच्च-प्राथमिकता क्षेत्रों को कवर करेगी, जिनमें शामिल हैं—

  • बायोमेट्रिक लाइवनेस डिटेक्शन टूल का विकास, ताकि स्पूफिंग और पहचान धोखाधड़ी रोकी जा सके।

  • बेहतर सटीकता और गति के लिए उन्नत बायोमेट्रिक मिलान एल्गोरिथ्म

  • सांख्यिकीय और एआई मॉडल का उपयोग कर धोखाधड़ी और असामान्यता का पता लगाना

  • उच्च-जोखिम नामांकन या अपडेट श्रेणियों की पहचान, ताकि यूआईडीएआई समय रहते संभावित कमजोरियों को चिह्नित कर सके।

  • समझौते की अवधि के दौरान संयुक्त रूप से पहचाने गए अन्य प्राथमिक परियोजनाएं।

आधार के लिए इसका महत्व
आधार भारत में डिजिटल पहचान सत्यापन का एक महत्वपूर्ण ढांचा बन चुका है, जो बैंकिंग, कल्याणकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा रहा है। लेकिन बढ़ते डिजिटल खतरों और गोपनीयता संबंधी चिंताओं के बीच, इस प्रणाली की अखंडता, सटीकता और धोखाधड़ी-रोधी क्षमता सुनिश्चित करना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

यूआईडीएआई–आईएसआई सहयोग इन चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक-आधारित समाधान पेश करेगा। उदाहरण के लिए, बायोमेट्रिक स्पूफिंग आधार सत्यापन के लिए एक गंभीर खतरा रहा है। लाइवनेस डिटेक्शन टूल विकसित करके यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि बायोमेट्रिक डेटा (जैसे फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन) किसी जीवित व्यक्ति से ही लिया जाए, न कि किसी प्रतिकृति या फोटो से।

भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) की भूमिका
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के तहत स्थापित आईएसआई सांख्यिकी, कंप्यूटर विज्ञान और डेटा विज्ञान में अग्रणी शोध संस्थान है। इसका बेंगलुरु केंद्र गणितीय मॉडलों के शासन और तकनीकी प्रणालियों में वास्तविक उपयोग के लिए प्रसिद्ध है।

इस सहयोग के माध्यम से यूआईडीएआई, आईएसआई की शैक्षणिक गहराई और व्यावहारिक विशेषज्ञता का लाभ उठाकर आधार को एक अगली पीढ़ी का, बुद्धिमान, अनुकूलनीय और सुरक्षित पहचान प्लेटफ़ॉर्म बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

दुनिया का सबसे जहरीला बिच्छू कौन सा है?, जानें कहाँ पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बिच्छू

धरती पर मौजूद सबसे डरावने जीवों में बिच्छू (Scorpion) का नाम जरूर लिया जाता है।…

3 weeks ago

भारत में कहाँ है एशियाई शेरों का असली घर? दुनिया की इकलौती जगह जहाँ जंगल में आज़ादी से घूमते हैं Asiatic Lions

शेरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में अफ्रीका के विशाल जंगलों की तस्वीर…

4 weeks ago

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

4 weeks ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

4 weeks ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

4 weeks ago

भारत का कौन-सा शहर कहलाता है “Mini India”? जानिए क्यों मिली यह खास पहचान

भारत अपनी विविधता, संस्कृति, भाषाओं और परंपराओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।…

4 weeks ago