नए समझौते के बाद UAE भारत का दूसरा सबसे बड़ा LNG सप्लायर

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान की जनवरी 2026 में भारत यात्रा के दौरान भारत और UAE के बीच एक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक ऊर्जा समझौता संपन्न हुआ। इस समझौते के तहत UAE भारत को हर वर्ष 0.5 मिलियन मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति करेगा। इस करार के बाद UAE, क़तर के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता बन गया है, जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध और मज़बूत हुए हैं।

क्यों चर्चा में?

भारत और UAE ने नई दिल्ली में शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान की आधिकारिक यात्रा के दौरान एक दीर्घकालिक LNG आपूर्ति समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ UAE, क़तर के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा LNG आपूर्तिकर्ता बन गया।

दीर्घकालिक LNG समझौता

  • इस यात्रा का सबसे अहम परिणाम हर वर्ष 0.5 मिलियन मीट्रिक टन LNG की आपूर्ति का दीर्घकालिक करार रहा।
  • LNG एक अपेक्षाकृत स्वच्छ जीवाश्म ईंधन है, जिसका उपयोग बिजली उत्पादन, उद्योग और रसोई गैस में व्यापक रूप से किया जाता है।
  • आर्थिक वृद्धि और शहरीकरण के कारण भारत की ऊर्जा मांग तेज़ी से बढ़ रही है।
  • यह समझौता वैश्विक ऊर्जा अनिश्चितता के दौर में स्थिर और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
  • पारंपरिक रूप से प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता रहे UAE के साथ यह करार स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग का विस्तार करता है।
  • क़तर से आगे आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाकर भारत आपूर्ति जोखिम कम करता है और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करता है, जो सतत आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

व्यापार, रक्षा और आर्थिक सहयोग

  • ऊर्जा के अलावा, दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया।
  • वर्तमान में (2023–24) भारत–UAE द्विपक्षीय व्यापार लगभग 84 अरब अमेरिकी डॉलर है, जिससे UAE भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है।
  • दोनों नेताओं ने रणनीतिक रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई, जो हिंद महासागर क्षेत्र और पश्चिम एशिया में बढ़ते सुरक्षा सहयोग को दर्शाती है।
  • निवेश, अवसंरचना, फिनटेक, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल व्यापार उभरते हुए प्रमुख क्षेत्र हैं।
  • दोनों देशों के बीच समग्र आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA) व्यापार और निवेश प्रवाह को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

परमाणु और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग

  • वार्ताओं में नागरिक परमाणु सहयोग जैसे नए और उभरते क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई।
  • भारत में सतत परमाणु ऊर्जा विकास से जुड़े विधायी सुधारों (जैसे शांति अधिनियम) के बाद अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर खुले हैं।
  • परमाणु ऊर्जा को भारत की स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है।
  • उन्नत परमाणु बिजली संयंत्र संचालित करने वाला UAE इस क्षेत्र में विशेषज्ञता और तकनीक साझा कर सकता है।

यह सहयोग वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप है और बढ़ती ऊर्जा मांग को विविध एवं टिकाऊ स्रोतों से पूरा करते हुए भारत की कार्बन उत्सर्जन घटाने की प्रतिबद्धता को मज़बूत करता है।

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vikash

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