अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 07 जनवरी 2026 को एक बड़ा कदम उठाते हुए एक मेमोरंडम पर हस्ताक्षर किया है, जिससे अमेरिका उन 60 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संस्थाओं से अलग हो जाएगा, जो अमेरिका के हितों के खिलाफ काम करते हैं। इसमें भारत की अगुआई वाला इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) भी शामिल है। ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस और 65 अन्य एजेंसियों को अमेरिका विरोधी, बेकार या फिजूलखर्ची वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन बताया है। वॉइट हाउस ने कहा कि ये संगठन कट्टरपंथी जलवायु नीतियों, ग्लोबल गवर्नेंस और वैचारिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देते हैं, जो अमेरिकी संप्रभुता और आर्थिक ताकत के साथ टकराव में हैं।
वॉइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 35 गैर-संयुक्त राष्ट्रीय निकायों और 31 संयुक्त राष्ट्र से जुड़े संगठनों से अमेरिका को बाहर निकालने का आदेश देने वाली घोषणा पर हस्ताक्षर किए हैं। बयान में कहा गया है कि यह कदम उन सभी अंतरराष्ट्रीय संगठनों, संधियों और समझौतों की समीक्षा के बाद लिया गया है, जिनमें अमेरिका सदस्य या पक्षकार है।
व्यापक समीक्षा और औपचारिक निर्णय
इस कार्यकारी आदेश के तहत अमेरिका ने 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों, एजेंसियों और आयोगों को दिया जाने वाला समर्थन निलंबित कर दिया है। इनमें से अधिकांश संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध हैं और जलवायु कार्रवाई, श्रम मानक, सामाजिक विकास तथा परामर्शात्मक भूमिकाओं जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर कार्य करते हैं। ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका की भागीदारी, वित्तीय योगदान और राष्ट्रीय हितों से सामंजस्य के आधार पर व्यापक समीक्षा के बाद इस निकासी प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया है।
प्रशासन के अनुसार कई संस्थाएँ:
UNFCCC और पेरिस समझौते से अलगाव
निकासी का केंद्रीय बिंदु जलवायु ढाँचों से अमेरिका का बाहर होना है, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (UNFCCC) से, जो 1992 में अपनाया गया और पेरिस समझौते की आधारशिला है। UNFCCC वैश्विक जलवायु शमन और अनुकूलन प्रयासों का प्रमुख कानूनी ढाँचा है।
इंटरनेशनल सोलर एलायंस से निकास
प्रशासन ने 2015 में भारत–फ्रांस के नेतृत्व में शुरू किए गए इंटरनेशनल सोलर एलायंस से भी निकासी की है, जिसका उद्देश्य सौर ऊर्जा, तकनीकी हस्तांतरण और जलवायु कार्रवाई को बढ़ावा देना है। अधिकारियों के अनुसार ये निकाय ऐसी नीतियों को आगे बढ़ाते हैं जिन्हें प्रशासन अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं के विपरीत मानता है।
पूर्व की निकासी की निरंतरता
यह निर्णय ट्रंप काल की उस प्रवृत्ति को आगे बढ़ाता है, जिसमें पहले WHO, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और यूनेस्को से निकासी शामिल रही है।
अंतरराष्ट्रीय संस्थानों पर प्रभाव
अमेरिकी वित्तपोषण में कटौती से कई संस्थानों को कार्यक्रम और स्टाफ में कमी करनी पड़ी है। इससे विशेष रूप से प्रभावित क्षेत्र:
रणनीतिक क्षेत्रों में सहभागिता जारी
व्यापक निकासी के बावजूद अमेरिका कुछ संगठनों में चयनात्मक रूप से जुड़ा रहेगा, विशेषकर चीन के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा से जुड़े क्षेत्रों में—
अमेरिका की वैश्विक संस्थानों में भागीदारी की आगे भी समीक्षा जारी है, जिससे संकेत मिलता है कि यह कदम अंतिम नहीं, बल्कि बहुपक्षीयता के प्रति निरंतर पुनर्संयोजन की शुरुआत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की अनुपस्थिति से सामूहिक वैश्विक प्रयास कमजोर हो सकते हैं—खासतौर पर जलवायु परिवर्तन, मानवीय संकट, विकास वित्त और महामारी तैयारी के क्षेत्रों में। यह निकासी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका ऐतिहासिक रूप से ग्रीनहाउस गैसों के सबसे बड़े उत्सर्जकों में रहा है।
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