अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने लंबे समय से सहयोगी रहे सर्जियो गोर को भारत में अगला अमेरिकी राजदूत और दक्षिण एवं मध्य एशियाई मामलों के लिए विशेष दूत नामित किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत-अमेरिका संबंध ऊँचे टैरिफ़ और भू-राजनीतिक मतभेदों के चलते तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिससे यह भूमिका और भी संवेदनशील और अहम हो जाती है। गोर की नियुक्ति ट्रंप के इस इरादे को रेखांकित करती है कि वे अपने भरोसेमंद सहयोगियों को वैश्विक स्तर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर नियुक्त करना चाहते हैं।
उम्र: 38 वर्ष
जन्म: 1986, उज़्बेकिस्तान (तत्कालीन सोवियत संघ)
माल्टा में रहे, 1999 में अमेरिका प्रवास
लॉस एंजिलिस में हाई स्कूल और जॉर्ज वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में पढ़ाई
2008: जॉन मैक्केन के राष्ट्रपति चुनाव अभियान में काम किया
2013: सीनेटर रैंड पॉल की RANDPAC टीम में शामिल, उप-स्टाफ प्रमुख बने
2020: ट्रंप की राजनीतिक टीम से जुड़े, डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के साथ Winning Team Publishing की सह-स्थापना
2024: राष्ट्रपति कार्मिक निदेशक नियुक्त हुए
ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में 95% संघीय नियुक्तियों की जिम्मेदारी संभाली
“अमेरिका फर्स्ट एजेंडा” लागू करने में प्रमुख भूमिका
ट्रंप की आंतरिक टीम के बेहद क़रीबी, ट्रंप समर्थक कई किताबें प्रकाशित कीं
Right for America और MAGA Inc. जैसे प्रमुख सुपर पीएसी (Super PACs) का नेतृत्व किया
भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव:
भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ़ लगाया गया
रूस से भारत की तेल ख़रीदारी पर आलोचना
यह पद जनवरी 2025 से रिक्त था, जब एरिक गार्सेटी ने इस्तीफ़ा दिया
दोहरे पद (राजदूत + विशेष दूत) की नियुक्ति अभूतपूर्व है, जिससे नई दिल्ली में उनके अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठ रहे हैं
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