त्रिपुरा देश का तीसरा पूर्ण साक्षर राज्य बना

त्रिपुरा मिजोरम और गोवा के बाद तीसरा भारतीय राज्य बन गया है, जिसने 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच 95% साक्षरता के राष्ट्रीय मानक के अनुसार पूर्ण कार्यात्मक साक्षरता हासिल की है। इसकी घोषणा 23 जून, 2025 को अगरतला के रवींद्र सतबर्षिकी भवन में एक भव्य समारोह के दौरान की गई, जिसमें मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

समाचार में क्यों?

23 जून 2025 को अगरतला स्थित रवीन्द्र शताब्दी भवन में एक भव्य समारोह में त्रिपुरा को पूर्ण कार्यात्मक साक्षर राज्य घोषित किया गया। यह उपलब्धि ULLAS (नई भारत साक्षरता कार्यक्रम) के तहत मिली है, जो एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है। इस उपलब्धि के साथ त्रिपुरा ने मिजोरम और गोवा के बाद यह लक्ष्य हासिल करने वाला भारत का तीसरा राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री प्रो. (डॉ.) माणिक साहा और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

ULLAS कार्यक्रम (2022–2027) के प्रमुख उद्देश्य

  • 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के अशिक्षित युवाओं एवं वयस्कों को बुनियादी साक्षरता, संख्यात्मकता और जीवन कौशल प्रदान करना।

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप समावेशी और समान शिक्षा को बढ़ावा देना।

  • डिजिटल साक्षरता और प्रमाणन के लिए ULLAS मोबाइल ऐप जैसे आधुनिक टूल्स का उपयोग करना।

पृष्ठभूमि

  • 1961 में त्रिपुरा की साक्षरता दर: केवल 20.24%

  • 2025 में: बढ़कर 95.6% हो गई।

  • यह उपलब्धि सरकार, स्वयंसेवकों और जनसहभागिता से संभव हुई।

कार्यान्वयन की मुख्य विशेषताएँ

  • घर-घर सर्वेक्षण के माध्यम से अशिक्षित व्यक्तियों की पहचान।

  • सभी जिलों में जनजागरूकता और प्रचार अभियान

  • ULLAS ऐप के माध्यम से शिक्षार्थियों की सक्रिय भागीदारी और डिजिटल प्रमाणन।

  • लाखों स्वयंसेवी शिक्षकों, शिक्षार्थियों, और सामुदायिक नेताओं की भागीदारी।

  • मिशन मोड में तेज़ी से कार्यान्वयन और प्रभावी परिणाम।

व्यापक महत्व

  • त्रिपुरा की सफलता अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक प्रेरणा है।

  • यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की वयस्क शिक्षा पर विशेष बल को सशक्त बनाती है।

  • विकसित भारत @2047 की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।

  • यह दर्शाता है कि कर्तव्यबोध (कर्तव्य की भावना) और जनभागीदारी से राष्ट्रीय परिवर्तन संभव है।

निष्कर्ष:
त्रिपुरा की यह ऐतिहासिक उपलब्धि केवल राज्य के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए एक प्रेरक उदाहरण है कि जब सरकार, समाज और व्यक्ति मिलकर कार्य करें तो शिक्षा जैसे चुनौतीपूर्ण लक्ष्य भी सार्थक परिणाम दे सकते हैं।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

G7 Summit 2026: फ्रांस में दुनिया के 7 सबसे ताकतवर देशों की बैठक, जानिए 13 बड़े फैसले और भारत के लिए क्यों है खास

दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े फैसलों का मंच माने जाने…

4 weeks ago

दुनिया का सबसे जहरीला बिच्छू कौन सा है?, जानें कहाँ पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बिच्छू

धरती पर मौजूद सबसे डरावने जीवों में बिच्छू (Scorpion) का नाम जरूर लिया जाता है।…

2 months ago

भारत में कहाँ है एशियाई शेरों का असली घर? दुनिया की इकलौती जगह जहाँ जंगल में आज़ादी से घूमते हैं Asiatic Lions

शेरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में अफ्रीका के विशाल जंगलों की तस्वीर…

2 months ago

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

2 months ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

2 months ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

2 months ago