ब्रह्मांड के शुरुआती राज खोलेगा ‘क्रेडिट कार्ड’ साइज का कंप्‍यूटर

भारत का बेंगलुरु स्थित रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (RRI) एक क्रांतिकारी प्रयास कर रहा है, जो ब्रह्मांड के “कॉस्मिक डॉन” (Cosmic Dawn) — यानी वह काल जब पहली बार तारे और आकाशगंगाएँ बनीं — के रहस्यों को उजागर करने में मदद करेगा। इसके लिए विकसित किया गया है एक क्रेडिट कार्ड जितना छोटा सिंगल-बोर्ड कंप्यूटर (SBC), जो चंद्रमा पर स्थापित किए जाने वाले प्रतुश मिशन का हिस्सा होगा।

कैसे काम करेगा प्रतुश?

प्रतुश में लगाया गया डिजिटल रिसीवर सिस्टम इतना संवेदनशील है कि यह हाइड्रोजन परमाणुओं से निकलने वाले बेहद मंद रेडियो सिग्नल पकड़ सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह ऐसा है जैसे शोरगुल भरे स्टेडियम में किसी की फुसफुसाहट सुनना। पृथ्वी पर मौजूद रेडियो शोर और एफएम प्रसारण इन संकेतों को दबा देते हैं। इसलिए वैज्ञानिक इसे भविष्य में चंद्रमा की कक्षा से संचालित करने की योजना बना रहे हैं, जहां रेडियो हस्तक्षेप बहुत कम होता है।

प्रतुश (PRATUSH) क्या है?

  • यह एक चंद्रमा आधारित रेडियोमीटर मिशन है।

  • उद्देश्य: 21-सेमी हाइड्रोजन सिग्नल का अध्ययन करना।

    • यह सिग्नल ब्रह्मांड के शुरुआती समय में तटस्थ हाइड्रोजन परमाणुओं द्वारा उत्सर्जित हुआ था।

    • इसे पकड़कर हम करीब 13 अरब वर्ष पहले के कॉस्मिक डॉन के प्रत्यक्ष सबूत पा सकते हैं।

चंद्रमा क्यों?

पृथ्वी पर यह सिग्नल पकड़ना लगभग असंभव है क्योंकि यह भारी रेडियो व्यवधानों में दब जाता है:

  • एफएम रेडियो ट्रांसमिशन

  • आयनमंडल (Ionosphere) की गड़बड़ी

चंद्रमा का दूरस्थ भाग (far side) सौर मंडल का सबसे रेडियो-शांत क्षेत्र माना जाता है, जो ऐसे संवेदनशील मापन के लिए आदर्श है।

सिंगल-बोर्ड कंप्यूटर (SBC) की भूमिका

सामान्यतः अंतरिक्ष उपकरणों में भारी और अधिक ऊर्जा खपत करने वाले कंट्रोलर इस्तेमाल होते हैं।
लेकिन RRI की इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग टीम ने एक हल्के और कुशल SBC-आधारित डिजिटल रिसीवर का विकास किया है, जो:

  • एंटीना, रिसीवर और FPGA चिप का समन्वय करता है

  • रेडियो डेटा को रिकॉर्ड, स्टोर और प्री-प्रोसेस करता है

  • सिस्टम कैलिब्रेशन संभालता है

  • बहुत कम ऊर्जा में उच्च दक्षता प्रदान करता है

RRI के वैज्ञानिक गिरीश बी.एस. के अनुसार, यह SBC आकार, ऊर्जा और प्रदर्शन का आदर्श संतुलन है, जो चंद्र मिशनों के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।

परीक्षण परिणाम

  • 352 घंटे तक एक संदर्भ सिग्नल पर परीक्षण

  • शोर (Noise) को मिल्ली-केल्विन स्तर तक कम करने में सफलता

  • बेहद कमजोर सिग्नल पकड़ने की उच्च संवेदनशीलता

  • निरंतर संचालन में स्थिर प्रदर्शन

ये परिणाम दिखाते हैं कि यह प्रणाली अंतरिक्ष-आधारित रेडियोमेट्री के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।

भविष्य की योजनाएँ

RRI टीम अब आगे बढ़कर:

  • स्पेस-क्वालिफाइड SBCs का उपयोग करेगी

  • AI-सक्षम प्रोसेसिंग के लिए सॉफ़्टवेयर अपग्रेड करेगी

  • पूरे सिस्टम को एक कॉम्पैक्ट पेलोड के रूप में चंद्रमा पर तैनात करने की तैयारी करेगी

संभावित उपलब्धियाँ

यदि प्रतुश मिशन सफल होता है तो यह भारत की अंतरिक्ष विज्ञान उपलब्धियों में मील का पत्थर होगा और इससे:

  • पहले ब्रह्मांडीय ढाँचों (Cosmic Structures) की उत्पत्ति

  • शुरुआती ब्रह्मांड का विकास

  • और वर्तमान ब्रह्मांडीय मॉडलों से परे नई भौतिकी के बारे में अहम जानकारियाँ मिल सकती हैं।

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vikash

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