सिक्किम सरकारी कर्मचारियों हेतु सबैटिकल लीव योजना शुरू करने वाला पहला राज्य बना

सिक्किम भारत का पहला राज्य बन गया है जिसने सरकारी कर्मचारियों के लिए “अवकाश योजना” (Sabbatical Leave Scheme) शुरू की है। यह योजना कर्मचारियों को व्यक्तिगत और पेशेवर विकास के लिए एक अनूठा अवसर प्रदान करती है, साथ ही उन्हें नौकरी की सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है। यह प्रगतिशील नीति राज्य की प्रशासनिक प्रणाली में कार्यबल की भलाई, करियर विकास और प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

सिक्किम की सैबेटिकल लीव योजना की प्रमुख विशेषताएं

अगस्त 2023 में शुरू की गई यह योजना राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों पर लागू होती है जिन्होंने कम से कम पाँच वर्ष की निरंतर सेवा पूरी कर ली हो। इस नीति के तहत कर्मचारी 365 दिनों से लेकर अधिकतम 1,080 दिनों तक का सैबेटिकल अवकाश ले सकते हैं।

  • अवकाश अवधि के दौरान कर्मचारियों को उनके मूल वेतन का 50% भुगतान किया जाएगा।

  • सेवा में वरिष्ठता (Seniority) बनी रहेगी, जिससे सेवा रिकॉर्ड में निरंतरता सुनिश्चित होगी।

  • आवश्यकता पड़ने पर सरकार कर्मचारियों को एक महीने के नोटिस पर वापस बुला सकती है।

यह योजना कर्मचारियों को लचीलापन और सरकार को आवश्यक सुरक्षा उपाय प्रदान करते हुए एक आदर्श कर्मचारी हितैषी प्रशासनिक मॉडल प्रस्तुत करती है।

अस्थायी कर्मचारियों के लिए पात्रता

विशेष बात यह है कि यह योजना अस्थायी कर्मचारियों को भी कवर करती है। जिन अस्थायी कर्मचारियों ने छह महीने की निरंतर सेवा पूरी कर ली है, वे भी नियमित कर्मचारियों के समान शर्तों पर सैबेटिकल अवकाश के लिए पात्र हैं, जिससे इस पहल की पहुँच और अधिक समावेशी बनती है।

योजना में हालिया सुधार

प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने अनुमोदन प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत किया है:

  • ग्रुप A और B के कर्मचारी: इनके अवकाश अनुमोदन का अधिकार अब कार्मिक विभाग के सचिव को दिया गया है।

  • ग्रुप C और D के कर्मचारी (अस्थायी कर्मचारी शामिल): इनका अवकाश अब संबंधित विभागाध्यक्षों द्वारा स्वीकृत किया जाएगा।

इस अधिकार के हस्तांतरण से प्रक्रिया में तेजी आएगी, नौकरशाही की बाधाएँ कम होंगी और निर्णय लेने में गति आएगी।

इस पहल का महत्व

लंबी अवधि का अवकाश लेने की अनुमति देकर, वह भी नौकरी की सुरक्षा बनाए रखते हुए, सिक्किम की सैबेटिकल लीव योजना कर्मचारियों के मानसिक और पेशेवर कल्याण के साथ-साथ संस्थागत स्थिरता को भी सुनिश्चित करती है। यह योजना न केवल निरंतर सीखने, कौशल विकास और व्यक्तिगत उन्नति को बढ़ावा देती है, बल्कि बेहतर प्रशासनिक शासन के सिद्धांतों को भी सशक्त बनाती है।

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vikash

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