थाईलैंड और कंबोडिया ने हफ्तों से जारी गंभीर सीमा संघर्ष को समाप्त करने पर सहमति व्यक्त की है, जो हाल के वर्षों में दक्षिण-पूर्वी एशिया के इन दोनों पड़ोसी देशों के बीच झगड़ों में से एक में तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह युद्धविराम लगभग तीन सप्ताह तक चले भयंकर संघर्ष के बाद हुआ है, जिसमें तोपखाने की बमबारी, रॉकेट हमले और लड़ाकू विमानों की उड़ानें शामिल थीं, जिसके परिणामस्वरूप सीमा के दोनों तरफ भारी मात्रा में जान-माल का नुकसान और व्यापक विस्थापन हुआ था।
इस समझौते का उद्देश्य स्थिति को स्थिर करना और आगे की गिरावट को रोकना है, साथ ही दीर्घकालिक राजनयिक प्रयासों के लिए एक मार्ग प्रशस्त करना है।
युद्धविराम समझौते पर थाईलैंड के रक्षा मंत्री नत्थाफोन नक्रफानित और उनके कंबोडियाई समकक्ष टी सेहा ने हस्ताक्षर किए।
दोनों रक्षा मंत्रालयों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार,
कथन में इस बात पर जोर दिया गया कि किसी भी प्रकार की सैन्य तैनाती से तनाव बढ़ सकता है और विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने के दीर्घकालिक प्रयासों को नुकसान पहुंच सकता है।
20 दिनों तक चले इस संघर्ष के गंभीर मानवीय परिणाम हुए।
जुलाई में हुई पिछली झड़पों में डोनाल्ड ट्रम्प की कथित संलिप्तता के कारण पूर्व युद्धविराम के टूटने के बाद झड़पें फिर से शुरू हुईं।
नवीनतम युद्धविराम अनसुलझे सीमा विवादों में युद्धविराम व्यवस्था की संवेदनशीलता को दर्शाता है और दक्षिणपूर्व एशिया में कूटनीतिक संपर्क तथा विश्वास-निर्माण उपायों के निरंतर महत्व को उजागर करता है।
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