हैदराबाद के गोलकोंडा किले में जीवंत और ऐतिहासिक बोनालू उत्सव की शानदार शुरुआत हुई, जो तेलंगाना की लोक परंपराओं से ओतप्रोत एक महीने तक चलने वाले उत्सव की शुरुआत थी। श्री जगदम्बा महाकाली मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी, जहाँ पहले बोनम सहित अनुष्ठान और प्रसाद पारंपरिक उत्साह के साथ किए गए। चमकीले परिधानों में सजी महिलाएँ, पोथाराजस द्वारा लयबद्ध नृत्य और अग्नि प्रदर्शन ने इस वार्षिक उत्सव की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भव्यता को उजागर किया।
बोनालू महोत्सव 2025 की शुरुआत 26 जून को हैदराबाद स्थित गोलकोंडा किले के श्री जगदम्बा महाकाली मंदिर में पारंपरिक उत्साह और धार्मिक श्रद्धा के साथ हुई। इस अवसर पर हजारों भक्तों ने भाग लिया। राज्य सरकार द्वारा ₹20 करोड़ की अनुदान राशि और प्रमुख नेताओं की उपस्थिति ने इस उत्सव के महत्व को और बढ़ा दिया।
उत्पत्ति: यह एक पारंपरिक हिंदू त्योहार है जो मुख्य रूप से तेलंगाना, विशेष रूप से हैदराबाद और सिकंदराबाद में मनाया जाता है।
उद्देश्य: श्रद्धालु माँ महाकाली को ‘बोनम’ (चावल, गुड़, दही और नीम पत्तों का मिश्रण) अर्पित करते हैं, जिससे वह बीमारियों और आपदाओं से रक्षा करें।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: यह त्योहार 19वीं सदी में फैली महामारी के दौरान मां काली से मिले संरक्षण के प्रति आभार प्रकट करने के लिए आरंभ हुआ था।
प्रारंभ स्थल: श्री जगदम्बा महाकाली मंदिर, गोलकोंडा किला
मुख्य अर्पण: पहला बोनम भव्य शोभायात्रा के साथ लंगरहौज़ क्रॉसरोड से लाया गया
विशेष प्रस्तुतियाँ: अग्नि-प्रदर्शन कलाकारों और पारंपरिक पोथराजू नृत्य ने धार्मिक रंग में सांस्कृतिक जीवंतता जोड़ी
महिलाओं की भागीदारी: पारंपरिक वेशभूषा में हजारों महिलाओं ने पूजा और अर्पण में हिस्सा लिया
पट्टू वस्त्र (रेशमी पोशाक) अर्पण: राज्य की ओर से मंत्री कोंडा सुरेखा ने देवी को पट्टू वस्त्र अर्पित किए
मंदिर अनुदान: हैदराबाद स्थित 2,783 महाकाली मंदिरों को ₹20 करोड़ की अनुदान राशि प्रदान की गई
विधानसभा अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार
परिवहन मंत्री पोनम प्रभाकर
हैदराबाद महापौर गडवाल विजयलक्ष्मी
सांसद ईटला राजेंद्र
विधान परिषद सदस्य के. कविता और विजयशांति
सिकंदराबाद बोनालू: 13–14 जुलाई, उज्जैनी महाकाली मंदिर
लाल दरवाजा व पुराना शहर बोनालू: 20–21 जुलाई
सुरक्षा प्रबंध: शहर प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा और यातायात नियंत्रण व्यवस्था की गई है
बोनालू महोत्सव न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपरा का प्रतीक भी है। गोलकोंडा से प्रारंभ होकर यह उत्सव राज्य भर में भक्ति, नृत्य और उत्साह के साथ मनाया जाएगा, जो देवी महाकाली के प्रति आस्था और आभार का भव्य प्रदर्शन है।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]ब्रिटेन (UK) की संसद ने 'तंबाकू और वेप्स बिल' को मंज़ूरी दे दी है। इस…
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने कोणार्क सूर्य मंदिर में एक महत्वपूर्ण संरक्षण अभियान शुरू किया…
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर…
अविभाजित आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नादेंडला भास्कर राव का हैदराबाद में 90 वर्ष की…
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने 22 अप्रैल 2026 को बहुप्रतीक्षित ऑनलाइन गेमिंग नियमों को अधिसूचित…
अटल पेंशन योजना (APY) ने 21 अप्रैल, 2026 तक इस योजना में कुल 9 करोड़…