भारत में हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) के रूप में मनाया जाता है। शिक्षक दिवस एक ऐसा दिन है जब हम उन सभी शिक्षकों के प्रति आभार प्रकट कर सकते हैं जिन्होंने हमारे जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस दिन को मनाते हुए हमें यह भी याद रखना चाहिए कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो हमें एक बेहतर समाज और उज्जवल भविष्य की ओर ले जाती है।
5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने का कारण डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के महान व्यक्तित्व और उनके शिक्षण के प्रति समर्पण में निहित है। यह दिन न केवल शिक्षकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है, बल्कि यह हमें शिक्षा की महत्ता और शिक्षक के योगदान को समझने का भी मौका देता है।
यूनेस्को की ओर से जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 के बाद से स्कूल न जाने वाले बच्चों की वैश्विक संख्या में 6 मिलियन का इजाफा हुआ है। भारत में शिक्षा को लेकर कई कानूनी प्रावधान बनाए गए हैं। इनमें से ज्यादातर संविधान में वर्णित हैं। संविधान के अनुच्छेद 45 के अनुसार सार्वभौमिक, निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान केंद्र और राज्य की संयुक्त जिम्मेदारी है। वहीं, अनुच्छेद 30 शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना से संबंधित है। अनुच्छेद 15, 17 और 46 में भारतीय समुदाय के कमजोर वर्गों के शैक्षिक हितों की रक्षा करने का प्रावधान है। साथ ही अनुच्छेद 239 केंद्र शासित प्रदेशों में शिक्षा का प्रावधान करता है।
डॉ. राधाकृष्णन एक विद्वान, शिक्षक और प्रसिद्ध दार्शनिक भी थे। उनका जन्म 5 सितम्बर 1888 को तिरुत्तनी में हुआ था। उनको देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से सम्मानित किया गया था। उनके द्वारा एजुकेशन क्षेत्र में किये गए कार्यों को ध्यान में रखते हुए शिक्षक दिवस को 5 सितंबर को मनाये जाने का फैसला किया गया।
भारतीय संस्कृति गुरु और शिष्य (शिक्षक और छात्र) के बीच के रिश्ते को बहुत महत्व देती है। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस न केवल डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती का उत्सव है, बल्कि यह शिक्षकों की लगन और कड़ी मेहनत का सम्मान भी करता है। जहाँ छात्रों को अपनी कृतज्ञता और प्रशंसा व्यक्त करने का अवसर मिलता है, वहीं शिक्षकों को आत्मचिंतन करने और छात्रों के लिए एक स्वस्थ और प्रेरक वातावरण बनाने का मौका मिलता है।
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