IDBI बैंक के चेयरमैन TN मनोहरन का निधन, जानें कौन थे

आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) के चेयरमैन और इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष टीएन मनोहरन का निधन हो गया है। वे केनरा बैंक के भी नॉन एक्जीक्यूटिव चेयरमैन भी रह चुके हैं। इससे पहले, उन्होंने जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा और कारोबार को बंद करने के लिए आरबीआई के निर्देश पर सहारा इंडिया फाइनेंस कॉर्पोरेशन में निदेशक के रूप में भी कार्य किया था।

भारत सरकार की ओर से उन्हें सत्यम कंप्यूटर्स सर्विसेज लिमिटेड के बोर्ड में भी विशेष निदेशक नियुक्त किया गया था। सत्यम पुनरुद्धार टीम में उनकी भूमिका के लिए उन्हें वर्ष 2009 में बिजनेस लीडरशिप और इंडियन ऑफ द ईअर से सम्मानित किया गया था। उन्हें भारत के प्रतिष्ठित नागरिक पुरस्कार ‘पद्मश्री’ से भी नवाजा गया था।

वित्त और बैंकिंग क्षेत्र में विशिष्ट करियर

टीएन मनोहरन का शानदार करियर कई दशकों तक फैला रहा, जिसमें उन्होंने भारत के वित्तीय क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। उन्होंने 2015 से 2020 तक केनरा बैंक के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और इसके बाद IDBI बैंक के अध्यक्ष के रूप में महत्वपूर्ण सुधारों का नेतृत्व करते हुए गवर्नेंस को सुदृढ़ किया। उन्होंने महिंद्रा एंड महिंद्रा और टेक महिंद्रा में स्वतंत्र निदेशक के रूप में भी कार्य किया, जहाँ उनके अनुभव ने इन कंपनियों को प्रमुख निर्णयों में मार्गदर्शन प्रदान किया।

सत्यं पुनरुत्थान

मनोहरन के करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक 2009 में हुए कॉर्पोरेट घोटाले के बाद सत्यं कंप्यूटर सर्विसेज लिमिटेड के पुनरुद्धार में उनकी भूमिका रही। भारत सरकार द्वारा विशेष निदेशक के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद, वे उस टीम का हिस्सा बने जिसने निवेशकों और आम जनता का विश्वास दोबारा कायम किया।

वित्तीय सुशासन में योगदान

अपने करियर के प्रारंभिक चरण में मनोहरन ने सहारा इंडिया फाइनेंस कॉरपोरेशन के निदेशक के रूप में भी कार्य किया, जिन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए नियुक्त किया था। उनका विशेषज्ञता क्षेत्र लेखांकन, अर्थशास्त्र, बैंकिंग, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कानून, जोखिम प्रबंधन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस तक विस्तृत था।

शैक्षणिक उपलब्धियां

मनोहरन केवल एक वित्तीय विशेषज्ञ नहीं, बल्कि एक विद्वान भी थे। उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से बी.कॉम किया और आंध्र प्रदेश के श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय से एम.कॉम की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने मद्रास लॉ कॉलेज, मद्रास विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई की और भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट संस्थान (ICAI) के फ़ेलो सदस्य बने। उनका जीवन भारतीय वित्तीय प्रणाली को स्थायित्व और नैतिकता देने की एक प्रेरणादायक मिसाल है।

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vikash

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