स्वामी विवेकानंद जी की 164वीं जयंती एक ऐसे महान चिंतक को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने आधुनिक भारत की आध्यात्मिक और सामाजिक सोच को दिशा दी। हर वर्ष 12 जनवरी को मनाया जाने वाला यह दिन आत्मविश्वास, अनुशासन और उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। स्वामी विवेकानंद का विश्वास था कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके युवा होते हैं। उनका संदेश आज भी भारत को आत्मविश्वास, एकता और प्रगति के मार्ग पर मार्गदर्शन करता है।
स्वामी विवेकानंद का जन्म 1863 में कोलकाता में नरेंद्रनाथ दत्त के रूप में हुआ। बचपन से ही उनमें तीव्र बुद्धि और जीवन व सत्य को जानने की गहरी जिज्ञासा थी। श्रीरामकृष्ण परमहंस से भेंट ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उनके मार्गदर्शन में नरेंद्रनाथ ने आध्यात्मिकता और सेवा का सच्चा अर्थ समझा। आगे चलकर वे स्वामी विवेकानंद बने और लोगों को उनकी आंतरिक शक्ति से परिचित कराने में अपना जीवन समर्पित कर दिया।
स्वामी विवेकानंद की सबसे सशक्त शिक्षाओं में निर्भयता का संदेश प्रमुख है। वे आत्मविश्वास रखने और कठिन परिस्थितियों में डटकर खड़े रहने की प्रेरणा देते थे। उनका मानना था कि हर मानव के भीतर अपार शक्ति छिपी है। उनके अनुसार कमजोरी दुख का कारण है, जबकि शक्ति सफलता की कुंजी है। उनके विचार लोगों को उठ खड़े होने, कठिन परिश्रम करने और अपने सपनों को कभी न छोड़ने की प्रेरणा देते हैं।
स्वामी विवेकानंद को युवाओं पर अटूट विश्वास था। वे युवाओं को एक मजबूत राष्ट्र के निर्माता मानते थे। उन्होंने युवाओं से चरित्र, अनुशासन और साहस विकसित करने का आह्वान किया। उनके लिए शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन निर्माण और मूल्यों के विकास का माध्यम थी। उनके विचार आज भी छात्रों को बड़ा सोचने, समाज की सेवा करने और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
स्वामी विवेकानंद ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को गर्व के साथ विश्व पटल पर प्रस्तुत किया। उन्होंने दिखाया कि भारतीय दर्शन सद्भाव, सहिष्णुता और एकता का संदेश देता है। उनकी वैश्विक उपस्थिति ने दुनिया की भारत के प्रति सोच को बदल दिया। उन्होंने सिद्ध किया कि आध्यात्मिकता और आधुनिक जीवन साथ-साथ चल सकते हैं और मानवता को शांति व समझ की ओर ले जा सकते हैं।
अपने विचारों को कर्म में बदलने के लिए स्वामी विवेकानंद ने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। यह मिशन शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में कार्य करता है। यह उनके इस विश्वास को दर्शाता है कि मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है। आज भी यह मिशन भारत और विश्वभर में असंख्य लोगों के जीवन को आशा और करुणा से स्पर्श कर रहा है।
12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि स्वामी विवेकानंद के युवाओं के प्रति दृष्टिकोण को सम्मान दिया जा सके। यह दिन हर छात्र और युवा को मजबूत मन और उदात्त हृदय बनाने की याद दिलाता है। यह ऊर्जा, रचनात्मकता और राष्ट्र को बेहतर बनाने की इच्छा का उत्सव है। स्वामी विवेकानंद का जीवन सिद्ध करता है कि एक व्यक्ति के विचार पूरी पीढ़ी को जगा सकते हैं।
तेजी से बदलती दुनिया में भी उनके विचार समय से परे हैं। वे युवाओं को महत्वाकांक्षा और मूल्यों, सफलता और सेवा, तथा ज्ञान और विवेक के बीच संतुलन बनाना सिखाते हैं। एक आत्मविश्वासी, एकजुट और आत्मनिर्भर भारत का उनका सपना आज भी देश की प्रगति को प्रेरित करता है।
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