लाल सागर सुरक्षा संकट के चलते समुद्री यातायात और राजस्व पर पड़े भारी प्रभाव को देखते हुए, स्वेज नहर प्राधिकरण (Suez Canal Authority – SCA) ने बड़े मालवाहक जहाजों के लिए ट्रांजिट शुल्क में 15% की छूट देने की घोषणा की है। यह कदम अमेरिका और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच हुए संघर्षविराम समझौते के तुरंत बाद उठाया गया है। हूती विद्रोही 2023 के अंत से लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बना रहे थे। यह छूट 15 मई 2025 से लागू होगी और इसका उद्देश्य वैश्विक शिपिंग कंपनियों—विशेष रूप से कंटेनर जहाजों—को स्वेज नहर मार्ग पर लौटने के लिए प्रोत्साहित करना है। स्वेज नहर, जो विश्व व्यापार की एक महत्वपूर्ण धुरी है, हाल के महीनों में इसके उपयोग और आय में भारी गिरावट देखी गई है।
समाचार में क्यों?
स्वेज नहर प्राधिकरण (Suez Canal Authority – SCA) ने 15 मई 2025 से बड़े मालवाहक जहाजों के लिए पारगमन शुल्क (ट्रांजिट फीस) पर 15% की छूट की घोषणा की है। यह कदम रेड सी (लाल सागर) में अमेरिका और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच संघर्षविराम के बाद उठाया गया है, जिनके हमलों के कारण जहाजरानी मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इस योजना का उद्देश्य प्रमुख वैश्विक शिपिंग कंपनियों—विशेषकर कंटेनर शिप्स—को स्वेज नहर की ओर लौटने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो वैश्विक व्यापार का एक अहम मार्ग है और जिसकी आमदनी और ट्रैफिक हाल के महीनों में बहुत घट गई थी।
पृष्ठभूमि और संकट की समयरेखा:
नवंबर 2023 से हूती विद्रोहियों ने इस्राइल और उसके सहयोगियों से जुड़े वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना शुरू किया।
प्रमुख शिपिंग कंपनियों ने जहाजों को स्वेज नहर की बजाय केप ऑफ गुड होप (Cape of Good Hope) के रास्ते मोड़ना शुरू कर दिया।
स्वेज नहर की वार्षिक आय 2023 में $10.3 अरब से गिरकर 2024 में मात्र $4 अरब रह गई।
नई छूट योजना के बारे में:
प्रभावी तिथि: 15 मई 2025
लाभार्थी: 130,000 मीट्रिक टन या अधिक की नेट टन भार वाले मालवाहक जहाज
छूट: ट्रांजिट शुल्क में 15% की कटौती (90 दिनों के लिए लागू)
घोषणा: स्वेज नहर प्राधिकरण के अध्यक्ष एडमिरल ओस्सामा रबी ने की, इटली के राजदूत से बैठक के बाद।
वैश्विक व्यापार और शिपिंग पर प्रभाव:
स्वेज नहर से गुजरता है:
~12-15% वैश्विक व्यापार
~30% वैश्विक कंटेनर यातायात
~8-9% वैश्विक ऊर्जा प्रवाह
भारत अपनी 80% यूरोपीय निर्यात इस मार्ग से करता है।
मार्ग बदलने के बाद:
शिपिंग लागत में 180% की वृद्धि
भाड़ा दरें बढ़ीं
यात्रा की अवधि 10–14 दिन तक लंबी हुई
ट्रैफिक वॉल्यूम और राजस्व पर असर:
स्वेज नहर का कुल टन भार (TTV):
11 मई 2025 को घटकर 4.84 लाख मीट्रिक टन रह गया (2024 में 1.35 मिलियन मीट्रिक टन था)।
केप ऑफ गुड होप का TTV:
43.8 लाख मीट्रिक टन, जो इस मार्ग की बढ़ती प्रधानता दर्शाता है।
चुनौतियाँ और उद्योग की प्रतिक्रिया:
संघर्षविराम के बावजूद हूती विद्रोही अब भी इस्राइली जहाजों को खतरा मानते हैं।
Maersk जैसी शिपिंग कंपनियाँ अब भी केप ऑफ गुड होप को प्राथमिकता देती हैं—युद्ध जोखिम प्रीमियम और क्रू की सुरक्षा को देखते हुए।
शिपिंग कंपनियों ने लंबे मार्ग की लागत ग्राहकों पर डाल दी है और कुछ हद तक उससे मुनाफा भी कमा रही हैं।
भारत सरकार ने भारत के मर्चेंडाइज ट्रेड इंडेक्स (Merchandise Trade Indices) का आधार वर्ष 2012-13…
माइक्रोसॉफ्ट ने 2026 में एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन के तहत भारतीय मूल की अधिकारी आशा…
हरशरण कौर त्रेहन को पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (PSPCL) में निदेशक (वाणिज्यिक) नियुक्त किया…
भारतीय रेलवे ने शिकायत निवारण, टिकट कन्फर्मेशन की भविष्यवाणी, हाउसकीपिंग सेवाओं और भीड़ प्रबंधन को…
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल प्रदेश के सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट में देश…
गुजरात सरकार ने India AI Impact Summit 2026 के दौरान Larsen & Toubro की व्योमा…