सूडान ने रूस को अफ्रीका में अपना पहला नौसैनिक अड्डा स्थापित करने की अनुमति दे दी है। यह ऐतिहासिक समझौता रूस को लाल सागर पर एक महत्वपूर्ण रणनीतिक स्थान देता है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह समझौता मॉस्को में सूडानी विदेश मंत्री अली यूसुफ अहमद अल-शरीफ़ और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच वार्ताओं के बाद अंतिम रूप से तय हुआ।
समझौते के अनुसार:
रूस को अड्डे पर 300 तक सैन्य कर्मियों को तैनात करने की अनुमति होगी।
रूस यहाँ चार नौसैनिक जहाज़, जिनमें परमाणु-संचालित जहाज़ भी शामिल हैं, तैनात कर सकेगा।
यह समझौता 25 साल के लिए होगा और यदि कोई पक्ष विरोध न करे तो यह हर 10 साल पर स्वतः नवीनीकृत होता रहेगा।
सूडानी अधिकारियों ने कहा कि सभी लंबित मुद्दों को हल कर लिया गया है और दोनों देशों के बीच पूर्ण सहमति बन गई है।
रूस की रुचि इसलिए बढ़ी है क्योंकि सीरिया के टार्टस नौसैनिक अड्डे तक उसकी पहुँच अनिश्चित होती जा रही है।
सूडान में अड्डा रूस के लिए एक बैकअप रणनीतिक स्थल बनेगा।
यह रूस की वैश्विक नौसैनिक पहुँच और शक्ति को मजबूत करेगा।
इस समझौते को रूस के लिए एक कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है, क्योंकि यह उसके पारंपरिक क्षेत्रों से बाहर सैन्य मौजूदगी का विस्तार है।
सूडान में जारी राजनीतिक अस्थिरता और अंदरूनी संघर्ष अड्डे के दीर्घकालिक संचालन को प्रभावित कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि रूस की सूडान में भूमिका जटिल है, क्योंकि उसके संबंध सेना और अर्धसैनिक समूहों दोनों से हैं।
फिर भी दोनों देशों ने दावा किया है कि समझौता पूरी तरह तय हो चुका है, जिससे यह कदम लाल सागर भू-राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
स्थान: पोर्ट सूडान के पास, लाल सागर पर
कर्मचारी: अधिकतम 300 रूसी कर्मचारी
नौसैनिक जहाज़: 4 जहाज़, जिनमें परमाणु-संचालित जहाज़ भी
अवधि: 25 वर्ष, 10-10 वर्ष के स्वतः विस्तार के साथ
वैश्विक व्यापार: लाल सागर–स्वेज मार्ग से 12% अंतरराष्ट्रीय व्यापार गुजरता है
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