लद्दाख में वार्षिक स्पितुक गुस्तोर महोत्सव की शुरुआत हो गई है, जिसने पूरे क्षेत्र को रंग-बिरंगे दृश्य, पवित्र अनुष्ठानों और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया है। यह उत्सव ऐतिहासिक स्पितुक मठ में आयोजित किया जाता है और विश्व शांति व समृद्धि के लिए सप्ताहभर चली प्रार्थनाओं के बाद मनाया जाता है। यह पर्व लद्दाख की कठोर सर्दियों के पहले और सबसे ठंडे चरण के समापन का भी प्रतीक माना जाता है।
दो दिवसीय स्पितुक गुस्तोर महोत्सव लद्दाख के स्पितुक मठ में आरंभ हुआ है। यह क्षेत्र का वर्ष का पहला मठीय उत्सव है और मौसमी परिवर्तन का संकेत देता है।
| पहलू | विवरण |
| स्पितुक गुस्टोर के बारे में | |
| प्रकार | लद्दाख का वार्षिक शीतकालीन उत्सव |
| स्थान | स्पितुक मठ, लेह के निकट, लद्दाख |
| तिथि (2026) | 16–17 जनवरी |
| ‘गुस्टोर’ का अर्थ | स्थानीय भाषा में ‘29वें दिन का बलिदान’ |
| बौद्ध संप्रदाय | गेलुक-पा (येलो हैट) तिब्बती बौद्ध परंपरा |
| महत्व | |
| आयोजन समय | तिब्बती कैलेंडर के 11वें महीने के 28वें और 29वें दिन |
| प्रतीकात्मक अर्थ | अच्छाई की बुराई पर विजय |
| उद्देश्य | विश्व शांति, सुख-समृद्धि और सभी प्राणियों के कल्याण के लिए प्रार्थना |
| पूर्व तैयारी | उत्सव से पहले सात दिनों तक विशेष प्रार्थनाएँ |
| विशेष अनुष्ठान | बुरी शक्तियों के प्रतीक पुतलों का दहन |
| मुख्य आकर्षण | |
| मुखौटा नृत्य (छम) | बौद्ध पौराणिक कथाओं का नाटकीय प्रस्तुतीकरण |
| पात्र | रक्षक देवता (धर्मपाल) और गेलुक-पा के संरक्षक देवता |
| मुखौटे | मिट्टी और कागज़ से बने, प्राकृतिक रंगों से रंगे, सोना/चाँदी से पॉलिश |
| वेशभूषा | रेशम और ब्रोकेड के वस्त्र |
| संगीत | लंबे तुरही, झांझ, शंख, घंटियाँ आदि |
| मठीय सहभागिता | |
| भाग लेने वाले मठ | स्तोक, संकर, साबू और स्पितुक मठ के भिक्षु |
| विशेष अनुष्ठान | मठ के रक्षक ताबीज (Protective Amulet) का दर्शन |
| श्रद्धालु | विश्वभर से आने वाले तीर्थयात्री, मठ परिसर रहता है अत्यंत जीवंत |
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