हर वर्ष 3 सितंबर को दुनिया भर के इंजीनियर, वास्तुकार और शहरी प्रेमी गगनचुंबी इमारत दिवस (Skyscraper Day) मनाते हैं। यह दिवस आधुनिक इंजीनियरिंग और वास्तुकला की ऊँचाइयों का जश्न है, जिसमें उन प्रतिष्ठित इमारतों की सराहना की जाती है जो आसमान को छूती हैं और प्रगति, रचनात्मकता तथा मानव महत्वाकांक्षा का प्रतीक हैं।
3 सितंबर का महत्व अमेरिकी वास्तुकार लुईस एच. सुलिवन के जन्मदिन से जुड़ा है, जिन्हें “गगनचुंबी इमारतों के जनक” कहा जाता है। उन्होंने “आकार कार्य का अनुसरण करता है” (Form follows function) का सिद्धांत प्रतिपादित किया और 19वीं शताब्दी के अंत तथा 20वीं शताब्दी की शुरुआत में आधुनिक गगनचुंबी इमारतों की नींव रखी। उनका योगदान आज भी वास्तुकला को दिशा देता है।
ये इमारतें केवल कंक्रीट और काँच की ऊँची संरचनाएँ नहीं हैं, बल्कि मानव क्षमता और शहरी नवाचार का प्रतीक हैं।
नवाचार (Innovation): नवीनतम सामग्री और डिज़ाइन सिद्धांतों का उपयोग
कुशलता (Efficiency): सीमित शहरी भूमि का सर्वोत्तम उपयोग
सौंदर्य (Aesthetic): कार्य और कला का अद्भुत संगम
ये इमारतें न केवल स्काईलाइन को परिभाषित करती हैं, बल्कि पर्यटन को बढ़ावा देती हैं, राष्ट्रीय गर्व का स्रोत बनती हैं और आर्थिक-सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करती हैं।
प्रमुख उदाहरण : कुआलालंपुर की पेट्रोनास टावर्स, लंदन का द शार्ड, और पेरिस का आइफ़िल टॉवर (यद्यपि तकनीकी रूप से गगनचुंबी इमारत नहीं, परंतु समान इंजीनियरिंग प्रतिभा का प्रतीक)।
इस वर्ष गगनचुंबी इमारत दिवस हमें उन दूरदर्शी लोगों की याद दिलाता है जिन्होंने असंभव को संभव किया। दुबई, शंघाई, न्यूयॉर्क और मुंबई जैसे शहर यह दिखा रहे हैं कि तकनीक और रचनात्मकता के मेल से भविष्य कैसा हो सकता है। अब लक्ष्य केवल ऊँचाई नहीं, बल्कि सतत, भूकंप-रोधी और पर्यावरण-अनुकूल डिज़ाइन हैं।
मनाया जाता है: 3 सितंबर को प्रतिवर्ष
समर्पित है: लुईस एच. सुलिवन के जन्मदिवस पर
सिद्धांत: “आकार कार्य का अनुसरण करता है”
प्रतीकात्मक महत्व: प्रगति, नवाचार और राष्ट्रीय पहचान
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