अटल बिहारी वाजपेयी की 7वीं पुण्यतिथि: 16 अगस्त, 2025

भारत अपने सबसे सम्मानित नेताओं में से एक अटल बिहारी वाजपेयी की 16 अगस्त 2025 को सातवीं पुण्यतिथि मना रहा है। कवि, लेखक, वक्ता और राजनेता वाजपेयी तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे और वे पहले गैर-कांग्रेसी नेता थे जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया। राजनीति से परे, उन्हें उनकी विनम्रता, काव्य-हृदय और मज़बूत किन्तु समावेशी भारत की दृष्टि के लिए याद किया जाता है।

अटल बिहारी वाजपेयी का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके पिता एक शिक्षक थे। वाजपेयी शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रहे और उन्होंने डीएवी कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में परास्नातक की उपाधि प्राप्त की। छात्र जीवन से ही उन्हें साहित्य, कविता और वाद-विवादों में गहरी रुचि थी, जिसने आगे चलकर उन्हें एक करिश्माई वक्ता और नेता के रूप में आकार दिया।

अटल बिहारी वाजपेयी – राजनीतिक सफर

वाजपेयी ने 1950 के दशक में भारतीय जनसंघ (BJS) से अपना राजनीतिक करियर शुरू किया। उनके प्रभावशाली भाषणों ने शीघ्र ही राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी भविष्यवाणी की थी कि एक दिन वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।

भाजपा की स्थापना

आपातकाल (1975–77) और जनता पार्टी के विघटन के बाद, वाजपेयी ने लालकृष्ण आडवाणी आदि के साथ मिलकर 1980 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्थापना की और इसके पहले अध्यक्ष बने।

भारत के प्रधानमंत्री

  • 1996 – 13 दिन तक प्रधानमंत्री।

  • 1998–1999 – 13 माह तक प्रधानमंत्री।

  • 1999–2004 – पूर्ण कार्यकाल तक प्रधानमंत्री।

उनके कार्यकाल की पहचान साहसिक निर्णयों, आर्थिक सुधारों और भारत की वैश्विक स्थिति को मज़बूत बनाने के प्रयासों से हुई।

अटल बिहारी वाजपेयी की प्रमुख उपलब्धियाँ

  • पोखरण-II परमाणु परीक्षण (1998): अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद भारत की परमाणु शक्ति का प्रदर्शन।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत।

  • सर्व शिक्षा अभियान: प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण पर ज़ोर।

  • विदेश नीति: पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता की पहल, जिसमें 1999 की लाहौर बस यात्रा शामिल।

  • आर्थिक सुधार: निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाना और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना।

सामने आई चुनौतियाँ

उनकी सरकार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा:

  • 1999 का कारगिल युद्ध

  • 2001 संसद पर हमला

  • 2002 गुजरात दंगे

इसके बावजूद, वाजपेयी को शांत नेतृत्व और लोकतंत्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए याद किया जाता है।

पुरस्कार और सम्मान

  • भारत रत्न (2015) – भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान।

  • पद्म विभूषण (1992)

  • बांग्लादेश और मोरक्को सहित कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान।

  • उनके नाम पर अटल टनल और अटल सेतु जैसी कई परियोजनाएँ।

निधन और विरासत

अटल बिहारी वाजपेयी का निधन 16 अगस्त 2018 को 93 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद हुआ। उनके निधन पर पूरे भारत ने शोक व्यक्त किया और उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
एक दूरदर्शी नेता, कवि और राजनेता के रूप में वाजपेयी की विरासत आज भी जीवित है — स्वर्णिम चतुर्भुज, सर्व शिक्षा अभियान जैसी योजनाएँ इसका प्रमाण हैं। उनका जन्मदिन, 25 दिसंबर, सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो पारदर्शिता, विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

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vikash

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