अंतरिक्ष अन्वेषण और अनुसंधान एजेंसी (एसईआरए) और ‘ब्लू ओरिजिन’ ने अपने मानवयुक्त अंतरिक्षयान कार्यक्रम के लिए भारत को साझेदार राष्ट्र घोषित किया है। यह कार्यक्रम उन देशों के नागरिकों के लिए है जिन्होंने कुछ अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में भेजे हैं या एक भी नहीं भेजे हैं।
अमेरिका स्थित एजेंसी एसईआरए ब्लू ओरिजिन के दोबारा इस्तेमाल किए जाने योग्य उपकक्षीय रॉकेट ‘न्यू शेपर्ड’ के भावी मिशन पर दुनिया भर के नागरिकों को छह सीट प्रदान करेगी। ‘न्यू शेपर्ड’ चुनिंदा अंतरिक्ष यात्रियां को 11 मिनट के लिए क्रेमन रेखा (पृथ्वी के सतह से करीब 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर) के पार भेजेगी जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरिक्ष की सीमा माना जाता है। अंतरिक्ष यात्री जमीन पर उतरने से पहले कई मिनट तक गुरुत्वाकर्षण की अनुपस्थिति में भारहीन होने की अवस्था का अनुभव करेंगे।
सेरा और ब्लू ओरिजिन के अधिकारियों के मुताबिक एजेंसी को एक भारतीय नागरिक को यह दुर्लभ मौका प्रदान करने की खुशी है। इसमें ऐसे शख्स को चुना जाएगा जो अंतरिक्ष यात्रा के चमत्कारों का अनुभव करना चाहता है। कोई भी भारतीय नागरिक लगभग 2.50 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 208 रुपये का शुल्क देकर इस कार्यक्रम के लिए पंजीकरण करा सकता है।
मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम के तहत न्यू शेपर्ड नाम के रॉकेट के इंसान को अंतरिक्ष भेजा जाएगा। दुनियाभर से छह नागरिक इस मिशन के लिए चुने जाएंगे। लगभग 11 मिनट की इस यात्रा के दौरान विशेष विमान अंतरिक्ष यात्रियों को कॉर्मन रेखा (100 किमी) से आगे ले जाएगा। कॉर्मन लाइन अंतरिक्ष की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमा है। दोनों एजेंसियों ने बताया कि अंतरिक्ष यात्री उड़ान के लिए वापस उतरने से पहले कई मिनट तक भारहीनता (weightlessness) का अनुभव कर सकेंगे।
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