भारतीय स्टेट बैंक ने तीव्र एवं सुरक्षित वैश्विक व्यापार के लिए एआई, ब्लॉकचेन और डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके आयात-निर्यात सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए कोलकाता और हैदराबाद में वैश्विक व्यापार वित्त केंद्र खोले हैं।
भारत के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने दो नए कार्यालय खोले हैं। इन्हें ग्लोबल ट्रेड फाइनेंस सेंटर कहा जाता है। इनमें से एक कोलकाता में और दूसरा हैदराबाद में है। यह मंगलवार को हुआ और यह बैंक और उसके ग्राहकों के लिए गर्व का क्षण है।
इन विशेष केंद्रों से लोगों और कंपनियों के लिए अंतर्देशीय व्यापार करना और विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं की खरीद-बिक्री करना आसान हो जाएगा। इसका मतलब आयात (भारत में चीजें लाना) और निर्यात (भारत से अन्य स्थानों पर चीजें भेजना) में मदद करना है।
इन केंद्रों पर 800 से ज़्यादा प्रशिक्षित कर्मचारी हैं। उनका काम व्यापार को तेज़, सुचारू और कम देरी वाला बनाना है।
अब तक, यह काम कागज़ों के ज़रिए किया जाता था, जिसमें बहुत समय लगता था। SBI अब हर काम को तेज़ और आसान बनाने के लिए डिजिटल टूल का इस्तेमाल करना चाहता है। वे AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और ML (मशीन लर्निंग) जैसी स्मार्ट तकनीकों का इस्तेमाल करेंगे, जो कंप्यूटर को खुद से सोचने और सीखने में मदद करती हैं।
वे ब्लॉकचेन का भी उपयोग कर रहे हैं, जो रिकॉर्ड को सुरक्षित और स्पष्ट रखता है, और दस्तावेज़ डिजिटलीकरण, जिसका अर्थ कागज़ की फ़ाइलों को कंप्यूटर फ़ाइलों में बदलना है। यह सब व्यापार को तेज़ और सुरक्षित बनाने में मदद करेगा।
इन नए बदलावों से व्यवसायों को तेज़ सेवा, मज़बूत सुरक्षा और बेहतर समग्र अनुभव मिलेगा। ग्राहकों को ज़्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा और काम ज़्यादा सटीक होगा।
एसबीआई के चेयरमैन श्री सी.एस. शेट्टी ने कहा कि यह न केवल बैंक की 70 साल की यात्रा का जश्न मनाने का एक तरीका है, बल्कि बैंकिंग के भविष्य की दिशा में एक स्मार्ट कदम भी है।
उन्होंने कहा कि चूंकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की दुनिया अधिक डिजिटल होती जा रही है, इसलिए SBI इसमें अग्रणी भूमिका निभाना चाहता है तथा भारत और विश्व भर में व्यवसायों की मदद करना चाहता है।
इन ग्लोबल ट्रेड फाइनेंस सेंटरों को शुरू करके, एसबीआई यह दिखा रहा है कि वह बैंकिंग में अगले बड़े बदलाव के लिए तैयार है। यह पुराने कागजी तरीकों को पीछे छोड़कर स्मार्ट, डिजिटल समाधानों की ओर बढ़ रहा है।
इससे भारतीय व्यवसायों को बढ़ने और विश्व बाजार के साथ बेहतर ढंग से जुड़ने में मदद मिलेगी, जिससे यह पता चलेगा कि भारत वैश्विक व्यापार के भविष्य के लिए तैयार है।
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