राज्य वन विभाग द्वारा की गई गणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में सारस क्रेन की संख्या बढ़ रही है। सर्वेक्षण से पता चला कि इटावा वन प्रभाग में सारस क्रेन की संख्या सबसे अधिक 3,289 दर्ज की गई, जो कि 500 अधिक है। जबकि मऊ वन प्रभाग ने एक दशक में पहली बार छह सारस क्रेन देखे।
उत्तर प्रदेश में सारस क्रेन की संख्या पिछले कुछ वर्षों में निरंतर बढ़ी है और वर्ष 2021 में 17,329 से बढ़कर वर्ष 2022 में 19,188, वर्ष 2023 में 19,522 तथा वर्ष 2024 में 19,918 हो गई है। 10 जुलाई 2024 को उत्तर प्रदेश के वन विभाग द्वारा जारी नवीनतम 2024 ग्रीष्मकालीन जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, राज्य पक्षी, सारस की कुल आबादी राज्य में बढ़कर 19,918 हो गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 396 की वृद्धि दर्शाता है।
राज्य में 10,000 नागरिकों की मदद से वन विभाग द्वारा ग्रीष्मकालीन जनगणना आयोजित की गई थी। उत्तर प्रदेश में भारत में सारस पक्षी की सबसे बड़ी आबादी पायी जाती है। पक्षियों की गणना उत्तर प्रदेश के वन क्षेत्र में की जाती है न कि निजी भूमि पर जहां पर भी ये पक्षी अक्सर पाए जाते हैं।
हाल ही में जारी जनगणना रिपोर्ट के अनुसार, सारस पक्षी की सबसे अधिक संख्या, 3289, इटावा वन प्रभाग में देखी गई थी। इटावा वन प्रभाग के बाद सबसे ज्यादा सारस पक्षी मैनपुरी (2,945), शाहजहाँपुर (1,212), औरैया (1,202), कन्नौज (786), हरदोई (735), संत कबीर नगर (717), कानपुर देहात (709), गोरखपुर (675), और सिद्धार्थ नगर (673) में देखी गईं।
सारस क्रेन का वैज्ञानिक नाम ग्रस एंटीगोन (Grus Antigone) है। यह विश्व का सबसे बड़ा उड़ने वाला पक्षी है, जिसकी लंबाई 152-156 सेंटीमीटर और पंखों का फैलाव 240 सेंटीमीटर है। सारस क्रेन मुख्य रूप से लाल सिर और इसकी ऊपरी गर्दन भूरे रंग की होती है, साथ ही हल्के लाल पैर होते हैं। यह आजीवन जोड़े में रहते हैं और इसना प्रजनन काल मानसून में भारी बारिश के दौरान होता है। ये मनुष्यों के साथ और अच्छी तरह से जल वाले मैदानों, दलदली भूमि, तालाबों तथा आर्द्रभूमि (जैसे उत्तर प्रदेश में धनौरी आर्द्रभूमि) में रहने के लिये जाने जाते हैं जो उनके निर्वहन तथा घोंसले के लिये उपयुक्त हैं।
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