रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 28 अगस्त 2025 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में “मिलमेडिकॉन 2025” (MILMEDICON 2025) का उद्घाटन किया। यह दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सैन्य परिस्थितियों में शारीरिक और मानसिक आघात (Trauma) पर केंद्रित है। सम्मेलन का आयोजन डीजीएमएस (सेना) – महानिदेशालय चिकित्सा सेवाएँ (Army) द्वारा किया गया है। यह पहल भारत के सैन्य स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार, लचीलापन और सुधार की दिशा में प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मिलमेडिकॉन 2025 केवल एक वैज्ञानिक मंच नहीं, बल्कि एक रणनीतिक मील का पत्थर है, जो भारतीय सेना के “सुधार वर्ष” (Year of Reforms) से जुड़ा हुआ है। इसका उद्देश्य है:
युद्ध क्षेत्र में ट्रॉमा केयर को बेहतर बनाना
वैश्विक चिकित्सा सहयोग को मजबूत करना
सैन्य स्वास्थ्य अवसंरचना का आधुनिकीकरण करना
अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं (Best Practices) का समावेश करना
सम्मेलन की एक प्रमुख विशेषता सैन्य नर्सिंग सेवा (MNS) के शताब्दी वर्ष का उत्सव है।
100 वर्षों से महिला चिकित्सा पेशेवरों की समर्पित सेवा को सम्मानित किया गया।
यह “नारी शक्ति” की नेतृत्व क्षमता और विरासत को उजागर करता है।
battlefield और नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।
दो दिवसीय कार्यक्रम में सैन्य चिकित्सा के भविष्य को आकार देने वाले विषयों पर उच्च स्तरीय चर्चा हुई, जैसे:
एडवांस्ड कॉम्बैट ट्रॉमा केयर – युद्धक्षेत्र में गंभीर चोटों के लिए आधुनिक उपचार और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली।
सैन्य स्वास्थ्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) – निदान, पूर्वानुमानित देखभाल और परिचालन दक्षता में एआई की भूमिका।
आपातकालीन एवं युद्धक्षेत्र चिकित्सा नवाचार – युद्ध जैसी परिस्थितियों के लिए विकसित हो रही नई तकनीकें और दृष्टिकोण।
कॉम्बैट मेडिकल रोल्स में महिलाएँ – स्वास्थ्य सेवाओं और नेतृत्व भूमिकाओं में महिलाओं के बदलते योगदान।
मिलमेडिकॉन 2025 में 15 से अधिक देशों की भागीदारी रही, जिससे यह एक वास्तविक वैश्विक मंच बन गया। प्रतिभागियों में शामिल रहे:
भारतीय सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी
अंतर्राष्ट्रीय सैन्य चिकित्सा प्रतिनिधिमंडल
नागरिक चिकित्सा विशेषज्ञ एवं शिक्षाविद
इसके अलावा, पैनल चर्चाएँ, पोस्टर प्रेजेंटेशन और वैज्ञानिक प्रदर्शनी जैसी गतिविधियाँ भी आयोजित हुईं। यह सहयोगात्मक आदान-प्रदान राष्ट्रों के बीच साझा लचीलापन और चिकित्सा तैयारी को सुदृढ़ करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
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