इज़राइल ने रोमन गोफमैन को मोसाद का प्रमुख नियुक्त किया

इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मेजर जनरल रोमन गोफमैन को मोसाद का अगला प्रमुख नियुक्त किया है। 13 अप्रैल, 2026 को इस नियुक्ति की पुष्टि ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हुई है, जब इज़राइल जटिल क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। वह 2 जुलाई, 2026 को आधिकारिक तौर पर कार्यभार संभालेंगे और डेविड बार्निया का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल जून में समाप्त हो रहा है।

रोमन गोफमैन कौन हैं?

  • रोमन गोफमैन को प्रधानमंत्री नेतन्याहू के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक माना जाता है।
  • वह वर्तमान में प्रधानमंत्री के सैन्य सचिव के रूप में कार्यरत हैं, और इज़राइल के रक्षा तथा रणनीतिक निर्णयों को आकार देने में उनकी गहरी भूमिका रही है।
  • उनका जन्म बेलारूस में हुआ था; गोफमैन 1990 में इज़राइल चले गए और इज़राइल रक्षा बलों (IDF) में एक शानदार करियर बनाया।
  • उन्होंने आर्मर्ड कोर में भी रैंकों में तरक्की की और अंततः वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिकाओं में जाने से पहले डिवीजन कमांडर बन गए।
  • इसके अलावा, प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ उनके घनिष्ठ जुड़ाव और सैन्य निर्देशों के समन्वय में उनकी भूमिका ने उन्हें इज़राइल की सुरक्षा व्यवस्था में एक केंद्रीय हस्ती बना दिया है।

यह नियुक्ति क्यों मायने रखती है?

गोफमैन को नियुक्त करने का फ़ैसला इज़रायल के लिए एक संवेदनशील समय पर आया है। देश को लगातार इन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है:

  • मध्य-पूर्व में लगातार बना तनाव
  • ग़ज़ा से जुड़ी सुरक्षा संबंधी चिंताएँ
  • साथ ही, इंटेलिजेंस और आतंकवाद-रोधी मोर्चे पर उभरती नई चुनौतियाँ

इज़राइल के सुरक्षा ढांचे में मोसाद की भूमिका

मोसाद, जिसे आधिकारिक तौर पर ‘इंस्टीट्यूट फॉर इंटेलिजेंस एंड स्पेशल ऑपरेशंस’ के नाम से जाना जाता है, इज़राइल की प्रमुख खुफिया एजेंसी है।

मोसाद की मुख्य जिम्मेदारियाँ इस प्रकार हैं:

  • विदेशी खुफिया अभियान चलाना
  • आतंकवाद-रोधी और गुप्त मिशनों को अंजाम देना
  • रणनीतिक खुफिया जानकारी जुटाना
  • साथ ही, विदेशों में राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा करना

संघर्षपूर्ण स्थितियों में गोफमैन का अनुभव

उनके नेतृत्व कौशल की असली परीक्षा 7 अक्टूबर, 2023 को हुई, जब हमास ने इज़राइल पर हमला किया था। उस समय वे त्ज़ेलीम प्रशिक्षण अड्डे की कमान संभाल रहे थे।

रिपोर्टों से पता चलता है कि उन्होंने:

  • तेज़ी से गाज़ा सीमा की ओर कूच किया
  • सक्रिय युद्ध स्थितियों में हिस्सा लिया
  • गोलीबारी के दौरान गंभीर चोटें खाईं

इस अनुभव ने उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है, जो न केवल ज़मीनी स्तर पर सक्रिय रहता है, बल्कि जिसने युद्ध के मैदान में अपनी काबिलियत भी साबित की है।

अनुमोदन प्रक्रिया और आधिकारिक पुष्टि

इस अपॉइंटमेंट को सरकारी एडवाइजरी कमेटी ने मंज़ूरी दी, जिसे इज़राइल के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व प्रेसिडेंट अशर ग्रुनिस लीड कर रहे थे।

इस कदम से यह पक्का होगा कि सीनियर अपॉइंटमेंट कानूनी और एडमिनिस्ट्रेटिव स्टैंडर्ड को पूरा करते हैं।

मंज़ूरी के बाद PM नेतन्याहू ने ऑफिशियली फैसले का ऐलान किया।

 

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vikash

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