पी. जयचंद्रन, जिन्हें ‘भाव गायकन’ के नाम से जाना जाता था, भारतीय संगीत उद्योग के एक दिग्गज पार्श्व गायक थे। 80 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। प्रेम, भक्ति और विरह जैसे भावनाओं को अपने गीतों के माध्यम से गहराई से व्यक्त करने वाले जयचंद्रन ने छह दशकों से अधिक समय तक भारतीय संगीत में योगदान दिया। मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और हिंदी में 16,000 से अधिक गीतों को अपनी आवाज़ देने वाले जयचंद्रन का निधन संगीत प्रेमियों के लिए अपूरणीय क्षति है।
| प्रमुख जानकारी | विवरण |
| समाचार में क्यों? | प्रख्यात पार्श्व गायक पी. जयचंद्रन का निधन। |
| उपनाम | भाव गायकन |
| जन्मस्थान | एर्नाकुलम, केरल |
| गाई गई भाषाएँ | मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, हिंदी |
| आयु | 80 वर्ष |
| रिकॉर्ड किए गए गीत | 16,000 से अधिक |
| प्रमुख पुरस्कार | राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, केरल जे.सी. डेनियल पुरस्कार, केरल राज्य फिल्म पुरस्कार (5 बार), तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार (2 बार) |
| प्रसिद्ध साझेदारियां | जी. देवराजन, एम.एस. बाबुराज, इलैयाराजा, ए.आर. रहमान, विद्यापसागर, एम. जयचंद्रन |
| प्रसिद्ध गीत | रसाथी उन्ना कणाथा नेन्जु, शिव शंकरा शरणा सर्व विभो, ओरु मुल्लप्पू मलयुमयी |
| डेब्यू फिल्म गीत | ‘ओरु मुल्लप्पू मलयुमयी‘ (फिल्म: कुंजलि मरक्कर) |
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