फ्यूचरब्रांड इंडेक्स की ग्लोबल रैंकिंग में रिलायंस दूसरे पायदान पर

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने फ़्यूचरब्रांड इंडेक्स 2024 में दूसरा स्थान हासिल कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है, जिससे उसने एप्पल और नाइकी जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनियों को पीछे छोड़ दिया। यह पहली बार है जब कोई भारतीय कंपनी इस प्रतिष्ठित वैश्विक रैंकिंग के शीर्ष तीन में शामिल हुई है। इस इंडेक्स में कंपनियों का मूल्यांकन उनके वित्तीय प्रदर्शन के बजाय ब्रांड धारणा (Brand Perception) के आधार पर किया जाता है। सैमसंग ने पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि रिलायंस ने एप्पल, नाइकी, डिज़्नी, नेटफ्लिक्स, माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल और टोयोटा जैसी कंपनियों को पछाड़ दिया।

रिलायंस की इस अद्भुत उपलब्धि का कारण क्या है?

रिलायंस का फ़्यूचरब्रांड इंडेक्स में सफर बेहद प्रभावशाली रहा है। वर्ष 2023 में इसे 13वां स्थान मिला था, लेकिन सिर्फ एक साल में यह दूसरी पायदान पर पहुंच गया। इस उछाल के पीछे उपभोक्ताओं का मजबूत भरोसा, रणनीतिक विस्तार और ऊर्जा, दूरसंचार एवं खुदरा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कंपनी की व्यापक मौजूदगी अहम कारण हैं। विविधीकरण और नवाचार की क्षमता ने रिलायंस की वैश्विक ब्रांड छवि को और अधिक मजबूत किया है।

रिलायंस की वैश्विक उपस्थिति भी इस उपलब्धि का एक प्रमुख कारक रही है। हरित ऊर्जा, डिजिटल सेवाओं और उपभोक्ता खुदरा क्षेत्र में निवेश के चलते कंपनी ने खुद को विभिन्न उद्योगों में एक अग्रणी ब्रांड के रूप में स्थापित किया है। इससे न केवल उपभोक्ताओं बल्कि निवेशकों और अन्य हितधारकों के बीच भी कंपनी की साख बढ़ी है।

वैश्विक ब्रांड परिदृश्य में क्या बदलाव आया है?

फ़्यूचरब्रांड इंडेक्स 2024 यह दर्शाता है कि शीर्ष ब्रांडों का भौगोलिक वितरण काफी बदल गया है। 2014 में शीर्ष 10 ब्रांडों में से 7 अमेरिकी कंपनियां थीं, लेकिन 2024 की रैंकिंग में केवल 4 अमेरिकी ब्रांड शीर्ष 10 में शामिल हैं। शेष ब्रांड एशिया-प्रशांत (APAC) और मध्य पूर्व (Middle East) क्षेत्र से आए हैं।

यह बदलाव दर्शाता है कि एशियाई और मध्य पूर्वी कंपनियां अब ब्रांड निर्माण में भारी निवेश कर रही हैं। खासतौर पर B2B कंपनियां अमेरिकी और यूरोपीय ब्रांडों के समकक्ष प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। यह उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक व्यापार परिदृश्य के विकास को दर्शाता है।

किन क्षेत्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया और किन्हें चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

फ़्यूचरब्रांड इंडेक्स 2024 के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन में उल्लेखनीय अंतर देखा गया:

  • वित्तीय क्षेत्र: यह सबसे मजबूत क्षेत्र रहा, जहां 15 में से 10 ब्रांडों की रैंकिंग में सुधार हुआ। इससे उपभोक्ताओं का बढ़ता भरोसा और वित्तीय सेवाओं की स्थिर वृद्धि स्पष्ट होती है।
  • स्वास्थ्य सेवा (हेल्थकेयर): 15 में से 10 ब्रांडों की रैंकिंग गिरी, जो इस क्षेत्र की चुनौतियों और सार्वजनिक धारणा में आई गिरावट को दर्शाता है।
  • उपभोक्ता उत्पाद (Consumer Staples): इस क्षेत्र में संतुलित वृद्धि देखी गई, जहां 5 कंपनियों की रैंकिंग में सुधार हुआ और 3 की रैंकिंग घटी।
  • सूचना प्रौद्योगिकी (IT): 9 कंपनियों की रैंकिंग में सुधार हुआ, लेकिन 11 की गिर गई, जो इस क्षेत्र की अस्थिरता को दर्शाता है।
  • ऊर्जा और संचार सेवाएं (Energy & Communication Services): इस क्षेत्र में गिरावट देखी गई, जहां अधिकतर कंपनियों की रैंकिंग गिरी। उदाहरण के लिए, गूगल की मूल कंपनी Alphabet 2014 में नंबर 1 पर थी, लेकिन 2024 में यह 57वें स्थान पर आ गई। इसी तरह, फेसबुक की मूल कंपनी Meta 2014 में 11वें स्थान पर थी, लेकिन अब 52वें स्थान पर आ गई है।
  • औद्योगिक क्षेत्र (Industrials): यह क्षेत्र ज्यादातर स्थिर रहा, लेकिन कोई बड़ा उछाल नहीं दिखा। Boeing तो रैंकिंग से पूरी तरह बाहर हो गया।

निष्कर्ष

फ़्यूचरब्रांड इंडेक्स 2024 वैश्विक ब्रांड धारणा में हो रहे बदलावों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। रिलायंस का दूसरा स्थान हासिल करना न केवल उसकी व्यावसायिक सफलता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक कॉर्पोरेट परिदृश्य में भारत की बढ़ती उपस्थिति को भी रेखांकित करता है। आगे चलकर कंपनियों के लिए ब्रांड विश्वास और रणनीतिक नवाचार प्रमुख भूमिका निभाएंगे, जिससे भविष्य की रैंकिंग तय होगी।

पहलू विवरण
क्यों चर्चा में? रिलायंस इंडस्ट्रीज ने फ़्यूचरब्रांड इंडेक्स 2024 में वैश्विक स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया, एप्पल, नाइकी और डिज़्नी को पछाड़ते हुए।
शीर्ष स्थान सैमसंग ने पहला स्थान प्राप्त किया।
रिलायंस की वृद्धि 2023 में 13वें स्थान से 2024 में 2वें स्थान पर पहुंचा, जिसका श्रेय मजबूत ब्रांड छवि, उपभोक्ता विश्वास और विभिन्न उद्योगों में विविधीकरण को जाता है।
प्रमुख प्रतिस्पर्धी एप्पल, नाइकी, वॉल्ट डिज़्नी, नेटफ्लिक्स, माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल और टोयोटा।
वैश्विक रुझान अमेरिकी ब्रांडों का दबदबा कम हुआ, जबकि एशिया-प्रशांत और मध्य पूर्वी ब्रांडों की प्रमुखता बढ़ी।
क्षेत्रीय प्रदर्शन वित्तीय क्षेत्र में 15 में से 10 ब्रांडों की रैंकिंग बढ़ी, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में 15 में से 10 ब्रांडों की रैंकिंग गिरी, आईटी और ऊर्जा क्षेत्र में मिला-जुला प्रदर्शन रहा।
सबसे बड़ी गिरावट Alphabet (Google) 2014 में नंबर 1 से 2024 में 57वें स्थान पर, Meta (Facebook) 11वें स्थान से 52वें स्थान पर आ गया।
महत्व पहली बार कोई भारतीय कंपनी शीर्ष तीन में पहुंची, जो भारत के वैश्विक व्यापार प्रभाव में वृद्धि को दर्शाता है।
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vikash

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