वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की वित्तीय प्रणाली मजबूत और लचीली बनी हुई है, ऐसा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की नवीनतम आकलन रिपोर्ट में कहा गया है। रिपोर्ट में जहाँ तेज़ आर्थिक वृद्धि और बैंकों की बेहतर स्थिति को रेखांकित किया गया है, वहीं कुछ उभरते जोखिमों पर सतर्क रहने की चेतावनी भी दी गई है। विशेष रूप से असुरक्षित ऋण, फिनटेक-आधारित क्रेडिट विस्तार और वैश्विक मौद्रिक चुनौतियाँ दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए निगरानी योग्य मानी गई हैं।
1. विकास परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ
तेज़ विकास ने ऋण मांग को समर्थन दिया और उधारकर्ताओं की वित्तीय स्थिति में सुधार किया, जिससे वैश्विक चुनौतियों के बावजूद वित्तीय स्थिरता को बल मिला।
2. बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार
3. बैंकों की पूंजी स्थिति मजबूत
4. उभरते जोखिम: असुरक्षित और फिनटेक ऋण
5. स्टेबलकॉइन और बाह्य क्षेत्र से जुड़ी चिंताएँ
इसके अलावा, भारतीय रुपये में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरावट देखी गई, जो व्यापार की शर्तों में कमजोरी, ऊँचे वैश्विक टैरिफ, और धीमे पूंजी प्रवाह जैसे कारकों से प्रभावित रही, जिससे बाह्य क्षेत्र के जोखिम बढ़े।
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