आरबीआई ने बैंकिंग क्षेत्र में चार प्रमुख सुधारों की घोषणा की

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 1 अक्टूबर 2025 को भारत की बैंकिंग प्रणाली को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने हेतु चार महत्वपूर्ण सुधार प्रस्तावित किए हैं। इन सुधारों का उद्देश्य बैंकिंग मानकों को वैश्विक स्तर से समरूप करना, वित्तीय लचीलापन बढ़ाना तथा MSME और आवास जैसे क्षेत्रों को सुदृढ़ पूंजी प्रावधानों के माध्यम से समर्थन देना है।

1. जोखिम-आधारित जमा बीमा प्रीमियम

वर्तमान में सभी बैंक Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (DICGC) को समान दर से प्रीमियम देते हैं।
नई प्रणाली के तहत —

  • सुदृढ़ और सुशासित बैंक कम प्रीमियम देंगे।

  • कमज़ोर या जोखिमपूर्ण बैंक अधिक प्रीमियम देंगे।
    ➡ इससे जिम्मेदार बैंकिंग को प्रोत्साहन मिलेगा और दीर्घकाल में जमाकर्ताओं की सुरक्षा व वित्तीय स्थिरता मज़बूत होगी।

2. अपेक्षित ऋण हानि प्रावधान ढांचा

1 अप्रैल 2027 से RBI ECL मॉडल लागू करेगा —

  • लागू होगा: अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (छोटे वित्त बैंक, पेमेंट बैंक, RRBs को छोड़कर) और सभी भारत स्तरीय वित्तीय संस्थानों (AIFIs) पर।

  • यह पारंपरिक incurred loss model की जगह लेगा।

  • ECL मॉडल के तहत —

    • ऋण जोखिम की पहचान पहले चरण में करनी होगी।

    • प्रोएक्टिव प्रावधान (provisioning) बढ़ाना होगा।

  • संक्रमण के लिए RBI ने मार्च 2031 तक चार-वर्षीय मार्गदर्शक अवधि (glide path) दी है।

3. संशोधित बेसल-III पूंजी मानक

1 अप्रैल 2027 से लागू —

  • MSME और आवासीय रियल एस्टेट (जैसे गृह ऋण) के लिए जोखिम भार (risk weight) कम किया जाएगा।

  • क्रेडिट जोखिम हेतु नया मानकीकृत दृष्टिकोण (Standardised Approach) जारी किया जाएगा।
    ➡ परिणामस्वरूप —

  • इन लक्षित क्षेत्रों के लिए पूंजी आवश्यकताएँ कम होंगी।

  • MSME और किफायती आवास क्षेत्र में ऋण प्रवाह बढ़ेगा।

  • संपूर्ण बैंकिंग प्रणाली की पूंजीगत लचीलापन (capital resilience) सुदृढ़ होगी।

4. नए निवेश और व्यवसाय दिशानिर्देश

  • बैंकों और उनके समूह उपक्रमों के बीच व्यवसायिक ओवरलैप पर पूर्व प्रतिबंध हटाए गए हैं।

  • अब व्यवसाय संरचना पर निर्णय बैंक के निदेशक मंडल द्वारा लिया जाएगा।
    ➡ इससे रणनीतिक लचीलापन और प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी।

रणनीतिक उद्देश्य

RBI ने कहा कि ये सुधार —

  • भारत के नियमों को अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग मानकों से जोड़ेंगे।

  • ऋण व निवेश जोखिमों को बेहतर ढंग से संबोधित करेंगे।

  • पारदर्शिता, जोखिम-संवेदनशीलता और वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देंगे।

  • समावेशी ऋण वितरण और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को समर्थन देंगे।

महत्वपूर्ण तथ्य (Static Facts)

  • घोषणा की तिथि: 1 अक्टूबर 2025

  • ECL व Basel III प्रभावी तिथि: 1 अप्रैल 2027

  • संक्रमण अवधि: 31 मार्च 2031 तक

  • मुख्य उपाय:

    1. जोखिम-आधारित जमा बीमा प्रीमियम

    2. अपेक्षित ऋण हानि (ECL) प्रावधान मॉडल

    3. संशोधित बेसल-III पूंजी मानक (MSME व आवास क्षेत्र हेतु कम जोखिम भार)

    4. नए निवेश व व्यवसाय दिशानिर्देश (समूह इकाइयों के साथ ओवरलैप पर कोई प्रतिबंध नहीं)

  • मौद्रिक नीति: रेपो दर 5.5%, रुख – तटस्थ (Neutral)

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vikash

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